वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण केंद्र में हाथी मनु ने मनाई आज़ादी की पहली वर्षगांठ

मथुरा/आगरा। दशकों तक सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर किए गए और अमानवीय अत्याचार झेल चुके हाथी मनु के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगी है। एक वर्ष पूर्व अत्यंत दयनीय अवस्था में रेस्क्यू किए गए मनु ने अब वाइल्डलाइफ एसओएस की देखरेख में आज़ादी और सुरक्षित जीवन की पहली वर्षगांठ मनाई है। मथुरा स्थित हाथी अस्पताल परिसर में मनु को निरंतर पशु चिकित्सा उपचार, संतुलित आहार और स्नेहपूर्ण देखभाल मिल रही है।

Feb 13, 2026 - 19:18
 0
वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण केंद्र में हाथी मनु ने मनाई आज़ादी की पहली वर्षगांठ
वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण केंद्र में आजादी की पहली वर्षगांठ मनाता हाथी मनु।

रेस्क्यू के समय मनु की उम्र लगभग 58 वर्ष थी। वह वर्षों तक दुर्व्यवहार के कारण पूरी तरह दृष्टिहीन, कुपोषित और गंभीर शारीरिक पीड़ा से ग्रस्त था। जोड़ों का पुराना दर्द, पैरों में फोड़े और शरीर पर कई घाव उसकी स्थिति को और गंभीर बना रहे थे। सूचना मिलने पर वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने पाया कि मनु उत्तर प्रदेश के एक जिले में 36 घंटे से अधिक समय तक जमीन पर गिरा पड़ा था और खड़ा होने में असमर्थ था।

तत्काल रेस्क्यू और गहन उपचार

उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस की पशु चिकित्सा टीम ने मौके पर ही मनु को आपात उपचार दिया। विशेष लिफ्टिंग उपकरणों की मदद से उसे सुरक्षित रूप से खड़ा किया गया और फिर हाथी अस्पताल परिसर लाया गया, जहां 24 घंटे निगरानी में उसका इलाज शुरू हुआ।
डॉक्टरों ने उसके पुराने घावों और सूजन के लिए दवाइयों, लेजर थेरेपी, विशेष पैरों की देखभाल और चिकित्सीय मालिश का सहारा लिया। स्थायी रूप से नेत्रहीन होने के कारण उसके बाड़े और दिनचर्या को विशेष रूप से सुरक्षित और अनुकूल बनाया गया।

एक साल में दिखा सकारात्मक बदलाव

बीते एक वर्ष में मनु के स्वास्थ्य में धीरे लेकिन उत्साहजनक सुधार देखने को मिला है। अब वह अपने बाड़े में आत्मविश्वास के साथ घूमता है और परिचित आवाज़ों पर प्रतिक्रिया देता है। उसके आहार में संतुलित पोषण के साथ गन्ना और सेब जैसे पसंदीदा खाद्य पदार्थ शामिल हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, हाथी को बचाना सिर्फ पहला कदम होता है। इसके बाद महीनों और वर्षों तक धैर्यपूर्वक देखभाल जरूरी होती है। मनु की कहानी यह दर्शाती है कि गंभीर दुर्व्यवहार झेल चुके हाथियों के लिए दीर्घकालिक उपचार कितना आवश्यक है। वहीं सह-संस्थापक एवं सचिव गीता शेषमणि ने कहा, मनु को अधिक सहज और आत्मविश्वासी होते देखना हमारी टीम के लिए बेहद संतोषजनक है। उसकी प्रगति करुणामय देखभाल की शक्ति को दर्शाती है।

SP_Singh AURGURU Editor