जो हाथी कभी रोया था: राजू ने आज़ादी के 11 साल पूरे कर रच दिया करुणा और साहस का इतिहास

वाइल्डलाइफ एसओएस के फरह स्थित हाथी अस्पताल में राजू नाम का हाथी आज अपनी मुक्ति की वर्षगांठ मना रहा है। राजू अब एक प्रतीक बन चुका है क्रूरता पर दया की जीत का, बंधन से मुक्ति की राह का, और यह विश्वास दिलाने का कि हर जीवन को सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है।

Jul 5, 2025 - 12:50
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जो हाथी कभी रोया था: राजू ने आज़ादी के 11 साल पूरे कर रच दिया करुणा और साहस का इतिहास
राजू हाथी, जिसे 11 साल पहले जंजीरों से मुक्ति मिली थी।  

मथुरा। कभी दर्द और बेड़ियों में जकड़े रहे हाथी राजू ने आज़ादी की अपनी 11वीं वर्षगांठ मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस हाथी अस्पताल परिसर में मनाई। यह वही राजू है, जिसे दुनिया भर में ‘हाथी जो कभी रोया था’ के नाम से जाना गया था। यह वाकया 2014 में तब का है जब भीषण अत्याचारों से मुक्त कराते वक्त उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े थे।

राजू की कहानी एक पीड़ा से भरी लंबी रात के अंत और नई सुबह की शुरुआत है। कभी उसे प्रयागराज की सड़कों पर जंजीरों में जकड़कर भीख मंगवाई गई। यह हाथी आज प्रकृति की गोद में सुकून भरा जीवन जी रहा है। उत्तर प्रदेश वन विभाग के सहयोग से वाइल्डलाइफ एसओएस ने राजू को बचाया था, जिसके बाद से उसकी जिंदगी में बदलाव की इबारत लिखी गई।

अब 61 वर्षीय राजू खुले आसमान के नीचे हर सुबह सैर करता है, तालाब में डुबकी लगाता है और धूल में लोटकर घंटों खेलता है। उसकी देखभाल में लगे विशेषज्ञों ने उसकी मुक्ति की 11वीं सालगिरह पर फलों की शानदार दावत रखी। रस भरे तरबूज, खीरे और मीठे खजूर से लेकर खास दलिया-चावल का केक भी सजाया गया।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा,राजू की आज़ादी की यह सालगिरह हम हर बार गर्व और भावुकता के साथ मनाते हैं। यह दुनिया भर से मिली करुणा और समर्थन का प्रतीक है, जो दर्शाता है कि दया और समर्पण से क्या संभव हो सकता है।

सह-संस्थापक और सचिव गीता शेषमणि ने कहा, राजू सिर्फ़ इसलिए खास नहीं कि वह क्या झेलकर आया है, बल्कि इसलिए भी कि उसने आज को कितनी खूबसूरती से अपनाया है। वह हर दिन हमारी प्रेरणा है।

वेटरनरी उप निदेशक डॉ. इलियाराजा ने बताया कि राजू शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है। उसका शांत और डर से मुक्त जीवन देखना बेहद संतोषजनक है।

SP_Singh AURGURU Editor