दयालबाग में तिरंगे के संग उमड़ा उत्साह, आध्यात्मिक गरिमा और देशभक्ति का अनोखा संगम
आगरा। 79वें स्वतंत्रता दिवस पर दयालबाग आज भोर से ही देशभक्ति और आध्यात्मिकता के अद्भुत रंग में रंगा नज़र आया। खेतों में उगते सूरज के साथ ही संत सुपरमैन योजना के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों से माहौल को जीवंत कर दिया। “जोश और उमंग” से भरे गीतों, नृत्यों और प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को राष्ट्रप्रेम की भावना से सराबोर कर दिया।
प्रातः खेतों के कार्य के पश्चात, हुजूर प्रो. प्रेम सरन सतसंगी साहब और रानी साहिबा के भण्डारा ग्राउंड पहुंचने पर एसएफजी और आरएएफ के वालंटियरों ने संयुक्त रूप से गार्ड ऑफ ऑनर प्रस्तुत किया।
ध्वजारोहण और देशभक्ति की लहर
भण्डारा ग्राउंड पर कार्यक्रम की शुरुआत रा धा /धः स्व आ मी सतसंग सभा के अध्यक्ष श्री गुर सरूप सूद (भूतपूर्व आईएएस) द्वारा ध्वजारोहण से हुई। राष्ट्रगान के बाद पीवी और आरईआई के छात्रों ने- सुनो भाई एक गान हमारा....दयालबाग झंडा गान प्रस्तुत किया।
इसके बाद डीईआई, आरईआई, पीवी प्राइमरी स्कूल, एक्सटेंडेड विंग, नर्सरी-कम-प्ले सेंटर, स्कूल ऑफ आर्ट एंड कल्चर, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, आश्रम नगर स्कूल एवं डेयरी बाग प्राइमरी स्कूल, प्रेम विद्यालय गर्ल्स इंटरमीडिएट कॉलेज, संत सुपरमैन योजना के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। आरएफ की महिला प्रतिभागियों ने आत्मरक्षा की तकनीकों, साहस और कुशलता का प्रदर्शन किया। अंत में नर्सरी-कम-प्ले सेंटर और संत सुपरमैन योजना के बच्चों को प्रसाद वितरित किया गया।
लाखों सतसंगियों तक पहुंचा सीधा प्रसारण
इस अवसर पर दयालबाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, सभी शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में सतसंगी मौजूद थे। समारोह का सीधा प्रसारण 500 से अधिक देश-विदेश की शाखाओं में किया गया, जिससे लाखों सतसंगी ऑनलाइन और ऑफलाइन जुड़े रहे।
सतसंग सभा के अध्यक्ष श्री गुर सरूप सूद ने कहा कि दयालबाग आरएएफ और महिला सशक्तिकरण की पहल समाज में सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और महिलाओं के लिए समान अवसर को बढ़ावा देती है। इससे समाज में विश्वास और आत्मसम्मान की भावना मजबूत होती है। उन्होंने कहा कि हमारे शैक्षणिक और सामाजिक ढांचे में अनुशासन, नैतिकता, सतत विकास और जीवन के मूल्य को केंद्र में रखता है। 15 अगस्त के मौके पर प्रस्तुत हर कार्यक्रम केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिकता का संगम था। इसका उद्देश्य युवाओं में जिम्मेदारी और राष्ट्रप्रेम जगाना है। उन्होंने कहा कि हमारा मॉडल सेवा, अनुशासन, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण-संवेदनशीलता पर आधारित है, जो किसी भी समाज को संतुलित और प्रगतिशील बना सकता है।
सतसंग सभा के सचिव श्री प्रेम दास सतसंगी ने कहा कि हमारा समन्वय मॉडल टीमवर्क और सेवा पर आधारित है। प्रत्येक संस्थान को अपनी भूमिका स्पष्ट रूप से समझाई जाती है, और सभी गतिविधियों में एक समान उद्देश्य—सेवा और राष्ट्रहित—को केंद्र में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस का आयोजन केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है। हमारे कार्यक्रम दयालबाग की परंपराओं और मूल्यों, सेवा, अनुशासन और एकता को प्रतिबिंबित करते हैं।