मानवता की सेवा का मूल है नैतिक अनुसंधान: एसएन मेडिकल कॉलेज में एथिक्स फर्स्ट कार्यशाला

आगरा। अनुसंधान का उद्देश्य केवल ज्ञानवर्धन नहीं, बल्कि मानवता की सेवा होना चाहिए और यह तभी संभव है जब उसके मूल में नैतिकता हो। यह विचार एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन डॉ. प्रशांत गुप्ता ने मंगलवार को 'एथिक्स फर्स्ट: वैज्ञानिक अनुसंधानों में मानव मूल्यों की सर्वोच्चता' विषय पर आयोजित कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में व्यक्त किए।

May 14, 2025 - 18:25
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मानवता की सेवा का मूल है नैतिक अनुसंधान: एसएन मेडिकल कॉलेज में एथिक्स फर्स्ट कार्यशाला
एसएन मेडिकल कॊलेज में  बुधवार को ‘एथिक्स फर्स्ट’ कार्यशाला के दौरान मंच पर मौजूद अतिथि एवं भागीदार शोधार्थी।

कार्यशाला का आयोजन एसएन मेडिकल कॉलेज की इंस्टिट्यूशनल एथिक्स कमेटी द्वारा किया गया, जिसमें चिकित्सा अनुसंधान में नैतिकता और मानव अधिकारों की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ. गुप्ता ने किया और नैतिक अनुसंधान को चिकित्सा पद्धति की आत्मा बताया।

एथिक्स कमेटी की भूमिका और दिशा-निर्देशों पर चर्चा

पूर्व प्राचार्य व एथिक्स कमेटी के अध्यक्ष डॉ. एएस सचान ने समिति की संरचना, कार्यप्रणाली और शोध अनुमोदन प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी। आयोजन सचिव डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि शोधकर्ताओं को नैतिक दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए समाज के प्रति उत्तरदायित्व निभाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अनुसंधान में उत्पन्न किसी भी प्रतिकूल घटना की रिपोर्टिंग अनिवार्य है।

सूचित सहमति और डेटा गोपनीयता पर विशेषज्ञों के व्याख्यान

आईसीएमआर-जलमा के उप निदेशक डॉ. राजकमल ने सूचित सहमति की प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अनुसंधान में प्रतिभागियों को उनकी भागीदारी के सभी पहलुओं की पूरी जानकारी देना और सहमति लेना नैतिक दायित्व है।

आईसीएमआर-एनआईसीपीआर, नोएडा की वैज्ञानिक एवं समन्वयक साइटोपैथोलॊजी विभाग डॉ. रुचिका गुप्ता ने गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस  दिशा-निर्देशों पर व्याख्यान देते हुए प्रतिभागियों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा पर बल दिया।

अनुसंधान में नैतिक दुविधाएं और आत्मनिर्णय का सिद्धांत

वैज्ञानिक समीक्षा समिति की अध्यक्ष डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने नैतिक दुविधाओं से निपटने की चुनौतियों पर चर्चा की, वहीं ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉ. नीतू चौहान ने ऑटोनॉमी यानी आत्मनिर्णय के सिद्धांत को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. आरती अग्रवाल ने सभी प्रतिभागियों से नैतिक अनुसंधान की प्रतिबद्धता का संकल्प दिलवाया। इस अवसर पर कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. टीपी सिंह, डॉ. अपूर्वा मित्तल, डॉ. गीतू सिंह, डॉ. प्रीति भारद्वाज और डॉ. अलका गुप्ता समेत बड़ी संख्या में चिकित्सा शिक्षक व शोधार्थी उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor