मौत भी नहीं कर पाई जुदा, 60 साल का साथ, 6 घंटे का फासला, आगरा में अमर प्रेम की मार्मिक कहानी

आगरा। आगरा जिसे मोहब्बत का शहर कहा जाता है, एक बार फिर अपने नाम को सच करता नजर आया। सदर क्षेत्र के सेवला जाट में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर दिल को छू लिया और आंखें नम कर दीं। यहां रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती का प्रेम इतना गहरा था कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी।

Jan 8, 2026 - 12:00
 0
मौत भी नहीं कर पाई जुदा, 60 साल का साथ, 6 घंटे का फासला, आगरा में अमर प्रेम की मार्मिक कहानी
भगवती प्रसाद अग्रवाल और उनकी पत्नी श्यामवती देवी।

आगरा। आगरा जिसे मोहब्बत का शहर कहा जाता है, एक बार फिर अपने नाम को सच करता नजर आया। सदर क्षेत्र के सेवला जाट में ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर दिल को छू लिया और आंखें नम कर दीं। यहां रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती का प्रेम इतना गहरा था कि मौत भी उन्हें अलग नहीं कर सकी।

अग्रवाल कॉम्प्लेक्स के निवासी 85 वर्षीय भगवती प्रसाद अग्रवाल और उनकी 82 वर्षीय पत्नी श्यामवती देवी ने लगभग 60 वर्षों तक एक-दूसरे का साथ निभाया। यह साथ सिर्फ जीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतिम यात्रा तक भी कायम रहा। पति के निधन के महज छह घंटे के भीतर पत्नी ने भी संसार से विदा ले ली।

परिजनों के अनुसार, दोनों के रिश्ते में अटूट प्रेम और समर्पण था। श्यामवती देवी का जीवन अपने पति के इर्द-गिर्द ही घूमता था। परिवार बताता है कि उन्होंने छह दशक तक कभी भी पति को भोजन कराए बिना खुद अन्न ग्रहण नहीं किया। उनका हर दिन, हर पल पति की सेवा और साथ में ही बीता।

बेटे राकेश अग्रवाल ने बताया कि 1 जनवरी से माता-पिता दोनों अस्वस्थ चल रहे थे और इलाज जारी था। रविवार देर रात करीब 3 बजे भगवती प्रसाद अग्रवाल की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ी और उन्होंने अंतिम सांस ले ली। उस वक्त श्यामवती देवी दूसरे कमरे में अचेत अवस्था में थीं, मानो किसी अनकहे संकेत की प्रतीक्षा कर रही हों।

सोमवार सुबह करीब 9 बजे, पति के निधन के ठीक छह घंटे बाद श्यामवती देवी ने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। ऐसा लगा मानो उन्हें अपने जीवनसाथी के जाने का आभास हो गया हो और वे भी उनके साथ उसी यात्रा पर निकल पड़ी हों।

सोमवार दोपहर जब दोनों की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरे मोहल्ले में शोक और भावुकता का माहौल था। हर आंख नम थी और हर जुबान पर यही बात थी कि यह सिर्फ पति-पत्नी नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और समर्पण की जीती-जागती मिसाल थे। लोगों ने इस जोड़े को ‘अमर सुहाग’ बताते हुए नमन किया और कहा कि ऐसा प्रेम आज के समय में विरल है।