आपातकाल में हर सेकंड की कीमत: हेल्प आगरा ने दिया सीपीआर का प्रशिक्षण देकर आमजन को बनाया ‘जीवन रक्षक’

आगरा में हेल्प संस्था द्वारा आयोजित सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने डेमो के जरिए लोगों को जीवन बचाने की तकनीक सिखाई, जिससे आपातकालीन स्थिति में त्वरित मदद संभव हो सके।

Apr 9, 2026 - 19:53
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आपातकाल में हर सेकंड की कीमत: हेल्प आगरा ने दिया सीपीआर का प्रशिक्षण देकर आमजन को बनाया ‘जीवन रक्षक’
हेल्प आगरा संस्था द्वारा गुरुवार को आयोजित सीपीआर प्रशिक्षण कार्यक्रम में डेमो के जरिए लोगों को जीवन बचाने की ट्रेनिंग देते विशेषज्ञ चिकित्सक।

आगरा। समाज में जीवन रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हेल्प आगरा के तत्वावधान में गुरुवार को मोती कटरा स्थित हेल्प हॉस्पिटल में सीपीआर प्रक्रिया का विशेष प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य आमजन को इस काबिल बनाना रहा कि वे आपातकालीन स्थिति में किसी की जान बचाने में सक्षम हो सकें और समाज सेवा की भावना को आगे बढ़ा सकें।

प्रशिक्षण सत्र में क्रिटिकल केयर एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. दीप्ती माला अग्रवाल और डॉ. सारिका श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों को कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के बीच का अंतर विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि कार्डियक अरेस्ट में मरीज की धड़कन अचानक बंद हो जाती है, जबकि हार्ट अटैक में दिल की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि ऐसी स्थिति में बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) और सीपीआर तकनीक बेहद अहम होती है। सही समय पर सीपीआर देने से मरीज को आपातकालीन सहायता मिलती है और जीवन बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसके लिए सीपीआर की तकनीकी जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है।

डेमो के माध्यम से प्रतिभागियों को सीपीआर की पूरी प्रक्रिया सिखाई गई, जिसमें छाती पर दबाव (चेस्ट कंप्रेशन) और सांस देने की विधि को प्रायोगिक रूप से समझाया गया। डॉक्टरों ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में हर व्यक्ति को यह जीवन रक्षक तकनीक आनी चाहिए, क्योंकि यह किसी भी आपात स्थिति में निर्णायक साबित हो सकती है।

कार्यक्रम में हेल्प आगरा के महासचिव गौतम सेठ, उपाध्यक्ष अजय मित्तल, विशेष बंसल, मंत्री नितिन अग्रवाल, राजीव गुप्ता, नंदकिशोर गोयल, मनीष गर्ग, अजय गुप्ता, अनुज राठी, बी.एल. अग्रवाल, ओ.पी. गोयल, डॉ. मोहित गुप्ता, आशीष गुप्ता, जलज गोयल सहित हॉस्पिटल के पैरामेडिकल स्टाफ ने सक्रिय भागीदारी की। सभी प्रतिभागियों को पांच-पांच लोगों के समूह में विभाजित कर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाने में सफल रहा, बल्कि समाज में ‘हर व्यक्ति बने जीवन रक्षक’ की भावना को भी मजबूती देने वाला साबित हुआ।

SP_Singh AURGURU Editor