आस्था प्यास से बेहाल: आगरा के यमुना आरती स्थल पर बूंद-बूंद को तरस जाते हैं श्रद्धालु
आगरा के यमुना किनारा रोड स्थित यमुना आरती स्थल पर हर रोज उमड़ने वाली आस्था की भीड़ इन दिनों भीषण गर्मी में प्यास से जूझ रही है। श्रद्धा के इस केंद्र पर पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
आगरा। शहर में यमुना किनारा रोड स्थित यमुना आरती स्थल, जहां हर शाम श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, इन दिनों एक बड़ी समस्या से जूझ रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय नागरिक पेयजल की कमी के चलते भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
शाम ढलते ही जब आरती की घंटियां गूंजती हैं और वातावरण भक्ति में डूब जाता है, उसी समय बड़ी संख्या में लोग यमुना तट पर पहुंचते हैं। इस स्थल की सुंदरता को और बढ़ाता है सामने स्थित एतमादुद्दौला का मकबरा, जो पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
लेकिन इस आस्था स्थल पर पीने के पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी अपने चरम पर है, सूरज की तपिश के बीच महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और पैदल आने वाले लोग प्यास से बेहाल हो जाते हैं। स्थिति यह है कि आवश्यक जल तक उपलब्ध नहीं है और लोग एक-एक बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकते नजर आते हैं।
यह हालात न केवल असुविधाजनक हैं, बल्कि मानव संवेदनाओं और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करते हैं। यमुना किनारे खड़े होकर भी लोगों का प्यासा रह जाना एक बड़ी विडंबना बन चुका है।
स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने आगरा नगर निगम से मांग की है कि यमुना आरती स्थल पर जल्द से जल्द स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मांगों में प्रमुख रूप से शामिल हैं- कम से कम एक वाटर कूलर या आरओ जल स्टॉल की स्थापना की जाए। शाम 9 बजे तक नियमित जल उपलब्धता रहे। जल व्यवस्था का नियमित रखरखाव और सफाई हो।
यह स्थल न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है, जिससे शहर की छवि प्रभावित होती है।