आगरा में नकली दवा कारोबार : दस साल से उठती आ रही आवाजों को कौन दबाता रहा?
आगरा। शहर में नकली दवा कारोबार का जाल नया नहीं है। पिछले दस वर्षों से जिला कैमिस्ट एसोसिएशन लगातार इस खतरे को सामने लाने की कोशिश करता रहा, परन्तु ड्रग विभाग की निष्क्रियता और उदासीन रवैये ने इस जाल को और मजबूत किया। अब जब शासन की विशेष सचिव रेखा एस चौहान ने आकर सख्ती का संकेत दिया है, तब जाकर इस पूरे मामले पर गंभीरता से कार्रवाई शुरू हुई है।
संगठन का एक दशक लंबा संघर्ष
जिला कैमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशू शर्मा बताते हैं कि उनका संगठन पिछले दस वर्ष से नकली दवाओं के कारोबार के खिलाफ अभियान चला रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर जिलाधिकारी तक, हर स्तर पर ज्ञापन और लिखित शिकायतें दी गईं। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। कलेक्ट्रेट में होने वाली मासिक समीक्षा बैठकों में भी इस मुद्दे को उन्होंने बार-बार उठाया। तत्कालीन जिलाधिकारियों ने इस पर एक्शन के निर्देश भी दिए, पर ड्रग विभाग की खामोशी बनी रही।
क्यों नहीं टूटी चुप्पी?
सवाल यह उठता है कि जब हर कोई नकली दवाओं का कारोबार करने वालों के बारे में जानता था, तब जिम्मेदार विभाग ने आंखें क्यों मूंद लीं। मतलब साफ है कि या तो विभाग की कार्यशैली में ढिलाई रही या फिर उन नेटवर्कों से समझौता होता चला गया, जो इस कारोबार को सुरक्षित बनाए हुए थे। आशू शर्मा कहते हैं, उनके संगठन की ओर से बार-बार ध्यान दिलाए जाने पर यदि समय रहते कठोर कदम उठाए जाते, तो नकली दवाओं का बाजार इतना बड़ा न बन पाता।
औषधि विभाग के लगातार निष्क्रिय रहने पर आशू शर्मा ने नकली दवाओं के खिलाफ जनता को जागरूक करने का अभियान शुरू कर दिया। लम्बे समय से आशू शर्मा सुबह के वक्त साइकिलिंग करते हैं। साइकिल पर राष्ट्रीय ध्वज लगाकर जगह-जगह पहुंचकर लोगों को बताते हैं कि आगरा में कैसे नकली दवाओं का कारोबार फल-फूल रहा है। यह जन जागरण अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसी क्रम में आशू ने विगत दिवस फौवारा पर दवा बाजार और कोतवाली के बीच खड़े होकर सार्वजनिक रूप से नकली दवा कारोबार के बारे में लोगों को बताया।
बाहर से आई कार्रवाई, तभी टूटी चुप्पी
आशू शर्मा का कहना है कि आश्चर्यजनक रूप से आगरा में नकली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई तब हुई, जब बाहर से जांच टीमें आईं और छापे मारे। यानी स्थानीय स्तर पर मौजूद ड्रग विभाग, जो मंडलीय मुख्यालय होने के बावजूद कार्रवाई के लिए सबसे जिम्मेदार था, पूरी तरह निष्क्रिय रहा। यही कारण है कि माफिया को किसी भी कार्रवाई का डर नहीं रहा।
विशेष सचिव की सख्ती : उम्मीद की नई किरण
रविवार को विशेष सचिव रेखा एस चौहान ने आगरा पहुंचकर संकेत दिया कि नकली दवा माफिया की कमर तोड़ने के साथ ही शासन अपने विभाग के भीतर भी जवाबदेही तय करेगा। यानी अब यह जांच केवल माफियाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि वर्षों तक शिकायतें मिलने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। ड्रग विभाग में वे कौन लोग हैं जो दवा माफिया को फलने-फूलने देते रहे।
सवाल जो उठते हैं
इस पूरे घटनाक्रम ने एक गहरी चिंता उजागर की है। अगर दस वर्षों से संगठन संघर्ष कर रहा था तो आवाज क्यों नहीं सुनी गई? क्या विभागीय मिलीभगत ने माफियाओं को सुरक्षित रखा? और क्या अब शासन वास्तव में सिस्टम की खामियों को दूर कर पाएगा?