200 से ज्यादा लोगों के नाम पर फर्जी लोन, करोड़ों की ठगी का जाल, आगरा साइबर क्राइम का मेगा खुलासा

आगरा में साइबर क्राइम पुलिस ने 200 से अधिक लोगों के नाम पर फर्जी लोन लेकर करीब 2–2.5 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। आरोपी आधार कार्ड में नाम-पता बदलकर बैंक और फाइनेंस कंपनियों से लोन लेते थे और सामान बेचकर रकम हड़प लेते थे। एक आरोपी गिरफ्तार है, अन्य की तलाश जारी है। KYC प्रक्रिया में हुई चूक की भी जांच की जा रही है।

Feb 18, 2026 - 16:02
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200 से ज्यादा लोगों के नाम पर फर्जी लोन, करोड़ों की ठगी का जाल, आगरा साइबर क्राइम का मेगा खुलासा
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी नारायण चौरसिया।

2 से 2.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की आशंका,  बैंक और फाइनेंस कंपनियां बनीं निशाना, मास्टरमाइंड गिरफ्तार, अन्य आरोपी फरार

आगरा। आगरा में साइबर क्राइम पुलिस ने बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है। आरोप है कि 200 से अधिक लोगों के नाम पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए लोन लेकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई। पुलिस के अनुसार अब तक 2 से 2.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस मामले में नारायण चौरसिया उर्फ नितिन चौरसिया को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।

एडीशनल डीसीपी आदित्य कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी 2021 से इस नेटवर्क को संचालित कर रहा था। गिरोह सुनियोजित तरीके से हर महीने 2 से 3 लोगों को निशाना बनाता था। अब तक जांच में तीन लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनमें से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है।

आधार में हेरफेर कर लेते थे लोन

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आधार कार्ड में नाम और पता बदलकर फर्जी पहचान तैयार करते थे। एक ही आधार नंबर पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर बैंक और फाइनेंस कंपनियों से लोन लिया जाता था।

प्राइवेट और सरकारी दोनों बैंकों को निशाना बनाया गया। गिरोह ने होम एप्लायंसेज, बाइक, स्कूटी, एसी और महंगे मोबाइल फोन पर फाइनेंस कराया। लोन स्वीकृत होते ही सामान को बाजार में कम कीमत पर बेच दिया जाता था और रकम हड़प ली जाती थी।

बैंकिंग सिस्टम की खामियों की भी जांच

सबसे बड़ा सवाल यह है कि केवाईसी प्रक्रिया को कैसे दरकिनार किया गया। पुलिस अब इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि आखिर बैंक और फाइनेंस कंपनियों की सत्यापन प्रक्रिया में कहां चूक हुई। थाना साइबर क्राइम, कमिश्नरेट आगरा की टीम डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल की पड़ताल कर रही है। अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान भी की जा रही है।

आगे की कार्रवाई

पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है।  बैंक खातों और लेनदेन की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस संभावित पीड़ितों से संपर्क कर रही है और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क की तलाश में जुटी है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।