बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नकली दवाएं बनाकर छाप रहे थे नोट, कंपनियों ने खुद कराई थी रेकी
आगरा। शहर के फौव्वारा क्षेत्र में दो दवा व्यवसाइयों के यहां हुई छापेमारी और वहां मिलीं तीन करोड़ रुपये से अधिक कीमत की नकली दवाओं की बरामदगी ने एक बार फिर आगरा के माथे पर कलंग का टीका लगा दिया है। सबसे हैरानी की बात ये है कि दवा माफिया द्वारा बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों की नकली दवाएं तैयार कराकर खपाई जा रही थीं। नकली दवा के ये खिलाड़ी शायद पकड़े भी न जाते, अगर इन बड़ी कंपनियों ने खुद ही सारे सबूत जुटाकर सरकार तक न पहुंचाए होते।
-नामी कंपनियों ने सीधे लखनऊ में साधा सम्पर्क, वहीं से बनी उचचस्तरीय टीम और रिजल्ट सामने आ गया
ड्रग विभाग और एसटीएफ को भी यह सफलता तभी मिल पाई जब जायडस सन फार्मा, ग्लेनमार्क और सनोफी जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों ने अपनी जासूसी टीमें आगरा में कई सप्ताह रोककर इन सभी नक्कालों की रेकी कराई। सारे ठिकाने पता लगाने के बाद सीधे लखनऊ में सम्पर्क साधा। जानकारी तो यह भी आ रही है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के स्तर से आदेश के बाद आगरा में यह छापेमारी हुई है।
दवा बाजार के सूत्र बताते हैं कि जायडस सन फार्मा, ग्लेनमार्क और सनोफी जैसी मल्टीनेशनल दवा कंपनियों के स्थानीय स्टॊकिस्टस ने इन कंपनियों के स्थानीय प्रतिनिधियों से शिकायतें कीं कि उनकी कंपनी की ये दवाएं बाजार में आधी कीमत पर उपलब्ध हैं। इससे स्टाकिस्ट की दवाओं की बिक्री रुक गई थी। इसके बाद एजेंट्स ने कंपनी के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजते हुए आशंका जताई कि बाजार में कंपनी की नकली दवाएं चलन में हैं।
इन सूचनाओं के बाद इन कंपनियों ने आगरा के दवा बाजार में अपनी-अपनी टीमें उतारीं। ये टीमें कहीं ग्राहक बनकर तो कहीं व्यापारी बनकर इन नकली दवा वालों की रेकी करते रहे। व्यापारी के रूप में ऒर्डर देकर ये मेडिकल स्टोर से गोदाम जाने वाले लोगों पर नजर रखते। इस पर दोनों मेडिकल स्टोर्स के गोदामों का पता लगाया गया। सब कुछ जानकारियां जुटाने के बाद ही इन कंपनियों ने लखनऊ में शासन स्तर पर सम्पर्क साधा।
लखनऊ से गठित ड्रग विभाग की टीम और यूपी एसटीफ ने जब आगरा में छापेमारी की तो नामी दवा कंपनियों के प्रतिनिधि इस टीम के साथ मौजूद थे। ये प्रतिनिधि ही टीम को उन सारे ठिकानों पर ले गये, जिनके बारे में वे पहले से ही जानकारियां जुटा चुके थे। इसी वजह से नक्कालों को सावधान होने का मौका नहीं मिल सका।
जिला आगरा केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष आशु शर्मा का कहना है कि आगरा के अंदर नकली दवाइयों का बड़े पैमाने पर व्यापार हो रहा है। दवा माफिया नकली दवाइयां पर क्यूआर कोड भी नकली लगाकर उसे बिल् से बेच रहे हैं। ड्रग विभाग नींद में सोया हुआ है। करोड़ों रुपये की नकली दवाएं आगरा से दूसरे राज्यों में भेजी जा रही हैं।