बरेली में अविवाहित गर्भवती बेटी की हत्या में पिता को उम्र कैद, भाई और बेटे ने दी गवाही  

बरेली। अविवाहित बेटी के गर्भवती होने पर गला घोंटकर हत्या करने वाले पिता को अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) तबरेज अहमद की अदालत ने उम्रकैद और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत जिले में यह पहली सजा है। इस फैसले की अहम बात यह रही कि पिता के खिलाफ खुद बेटे ने मुकदमा दर्ज कराया और कोर्ट में चाचा के साथ गवाही भी दी।

Jul 11, 2025 - 16:34
 0
बरेली में अविवाहित गर्भवती बेटी की हत्या में पिता को उम्र कैद, भाई और बेटे ने दी गवाही   

बरेली के सीबीगंज थाना क्षेत्र स्थित एक गांव में अनुसूचित जाति की अविवाहित युवती का प्रेम संबंध पड़ोसी गांव के पिछड़ा वर्ग के युवक से था। जब यह बात परिवार को पता चली, तब युवती तीन माह की गर्भवती थी। उसने प्रेमी से विवाह की जिद की, जिससे गांव में चर्चा फैल गई। लोगों के ताने सुनकर युवती का पिता मानसिक रूप से व्यथित हो गया। सामाजिक दबाव और बदनामी के डर से उसने खौफनाक कदम उठाया।

शादी की कोशिशें और प्रेमी का इनकार

कुछ लोगों ने दोनों की शादी कराने का प्रयास किया, लेकिन जब युवक ने विवाह से इनकार किया तो उसके विरुद्ध एससी-एसटी एक्ट के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया। इस दौरान युवती का पिता कहने लगा कि लोग उसे दूसरी जाति में बेटी की शादी को लेकर ताने मार रहे हैं। तनाव और सामाजिक दवाब की वजह से वह बेहद असहज हो गया था।

बेटी की गला घोंटकर हत्या, पिता ने रचा झूठा नाटक

घटना 7 अगस्त 2024 की रात की है। युवती छत के नीचे कमरे में अकेले सो रही थी जबकि परिवार के अन्य सदस्य छत पर थे। रात में पिता ने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद वह परसाखेड़ा चौकी पहुंचा और पुलिस से कहा कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसकी बेटी की हत्या कर दी।

हालांकि, कमरे में बाहर से कुंडी लगी होने और कोई जबरन प्रवेश न होने की पुष्टि से पुलिस को शक हुआ। कड़ी पूछताछ पर आरोपी पिता टूट गया और कबूल लिया कि बेटी के गर्भवती होने से बदनामी हो रही थी, इसलिए उसने हत्या की।

बेटे ने दर्ज कराया मुकदमा, पुलिस ने वीडियो बयान भी कोर्ट में पेश किया

हत्या के बाद बेटी के भाई ने अपने ही पिता के विरुद्ध शिकायत दी। पुलिस ने आरोपी के कबूलनामे का वीडियो भी बनाया जिसे अदालत में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया गया। पिता पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनस) की धारा 103 (हत्या) में मुकदमा दर्ज किया गया।

कोर्ट में चाचा के साथ बेटे ने दी गवाही, बनी सजा की सबसे बड़ी वजह

मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश (प्रथम) तबरेज अहमद की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष से एडीजीसी राजेश्वरी गंगवार ने दलील दी कि यह अपराध सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक दृष्टि से कलंक है। चाचा और बेटे की गवाही ने आरोपी पिता की सच्चाई को कोर्ट के सामने स्पष्ट कर दिया।

कोर्ट का कड़ा संदेश: ऐसे अपराधियों को छोड़ना समाज के लिए घातक

जज तबरेज अहमद ने कहा कि बेटी की हत्या एक गंभीर और घृणित अपराध है। यदि ऐसे अपराधियों को सख्त सजा नहीं दी जाएगी तो समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। हालांकि, मामले को विरल से विरलतम की श्रेणी में नहीं माना गया।

SP_Singh AURGURU Editor