शिक्षक बनने की राह से हटा ‘एफडीआर का रोड़ा’, देशभर के महाविद्यालयों को बड़ी राहत, आरटीआई अपील के बाद एनसीटीई ने सुधारी भूल, करोड़ों रुपये लौटाने का फैसला

आगरा। शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और दूरगामी राहत देने वाला फैसला सामने आया है। भारत सरकार के निर्देशों के अंतर्गत राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई), दिल्ली द्वारा संचालित 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (आई-टेप) की मान्यता प्रक्रिया में चली आ रही बड़ी तकनीकी अड़चन अब दूर हो गई है। अब किसी भी महाविद्यालय को बीए-बीएड, बीएससी-बीएड अथवा बीकॉम-बीएड जैसे पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए 12-12 लाख रुपये की अलग-अलग एफडीआर जमा नहीं करनी पड़ेगी।

Jan 17, 2026 - 22:30
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शिक्षक बनने की राह से हटा ‘एफडीआर का रोड़ा’, देशभर के महाविद्यालयों को बड़ी राहत, आरटीआई अपील के बाद एनसीटीई ने सुधारी भूल, करोड़ों रुपये लौटाने का फैसला
आरटीआई अपील और इस संबंध में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के प्रिंट आउट को दिखाते पियूष भार्गव।

यह महत्वपूर्ण बदलाव टीचर्स एजुकेशन क्षेत्र के विशेषज्ञ, आगरा के युवा उद्यमी एवं प्रकाशक तथा राखी प्रकाशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पियूष भार्गव की आरटीआई पहल के बाद संभव हो सका है। पियूष भार्गव ने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद से सूचना के अधिकार के तहत सवाल किया था कि इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम के अंतर्गत तीनों पाठ्यक्रमों के लिए कुल कितनी एफडीआर देय है।

एनसीटीई द्वारा भेजी गई नियमावली से संतुष्ट न होने पर पियूष भार्गव ने इस विषय में आरटीआई अपील दायर की। अपील पर सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन उससे पहले ही परिषद को अपनी भूल का अहसास हो गया। 17 जनवरी, शनिवार को राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की उत्तर क्षेत्रीय समिति ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए मिनट्स में स्पष्ट कर दिया कि इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम एक ही कार्यक्रम है, इसलिए इसके अंतर्गत संचालित सभी पाठ्यक्रमों के लिए केवल 12 लाख रुपये की एक एफडीआर ही ली जाएगी।

इसके साथ ही परिषद ने यह भी स्वीकार किया कि पूर्व में नियमों की गलत व्याख्या के कारण जिन महाविद्यालयों से अलग-अलग एफडीआर जमा करवाई गई थी, उनकी अतिरिक्त जमा राशि वापस की जाएगी। इस निर्णय से देशभर के सैकड़ों महाविद्यालयों को सीधा लाभ मिलेगा और कई करोड़ रुपये की राशि उन्हें लौटाई जाएगी।

पियूष भार्गव ने आरटीआई अपील और एनसीटीई की वेबसाइट पर अपलोड निर्णय के प्रिंट आउट दिखाते हुए बताया कि इस फैसले से न केवल महाविद्यालयों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि शिक्षक बनने की दिशा में संस्थानों के सामने खड़ी एक बड़ी बाधा भी समाप्त होगी। अब नए महाविद्यालयों को भी इस कार्यक्रम की मान्यता लेने में अनावश्यक आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।

इस सकारात्मक निर्णय के बाद शनिवार को दिनभर देशभर के महाविद्यालय संचालकों की ओर से पियूष भार्गव को व्हाट्सएप पर बधाई और धन्यवाद के संदेश मिलते रहे। सेल्फ फाइनेंस कॉलेज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एस. वी. आर्य (हिसार) ने भी फोन पर पियूष भार्गव की इस पहल की सराहना करते हुए इसे शिक्षक शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।

SP_Singh AURGURU Editor