नेपाल में ओली सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन, पुलिस की गोली से नौ छात्रों की मौत
काठमांडू। नेपाल की राजधानी काठमांडू सरकार विरोधी आग से धधक उठी है। चीनपरस्त पीएम केपी ओली की सरकार के खिलाफ हजारों छात्र-युवा सड़कों पर बेकाबू हो चुके हैं। युवाओं की भीड़ संसद परिसर में भी घुस गई और संसद पर कब्जा कर लिया। छात्रों और युवाओं की हिंसा को रोकने के लिए पुलिस द्वारा की गई फायरिंग और लाठीचार्ज में नौ छात्रों की मौत के बाद हालात और खराब हो गये हैं। ऐसा लग रहा है कि आंदोलित युवा ओली सरकार को उखाड़कर ही दम लेंगे। खबर लिखे जाने तक काठमांडू में उपद्रव जारी है।
यह आंदोलन सोशल मीडिया पर बैन के कारण भड़का है। आंदोलनकारी साफ चेतावनी दे रहे हैं कि यह लड़ाई सिर्फ सोशल मीडिया बैन तक सीमित नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और तानाशाही सरकार को उखाड़ फेंकने तक जारी रहेगी। संसद में घुसे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। आंसू गैस के गोले दागने के साथ फायरिंग भी की गई। काठमांडू में कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है। उपद्रव पर काबू पाने के लिए सेना को भी बुलाए जाने की खबरें हैं।
नेपाल सरकार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाने और भ्रष्टाचार को लेकर युवाओं में भारी आक्रोश देखने को मिला। राजधानी काठमांडू की सड़कों पर हजारों की संख्या में युवा प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया पर लगे बैन हटाने और भ्रष्टाचार की जड़ों को खत्म करने की मांग की।
सरकार ने शुक्रवार से फेसबुक, यूट्यूब और एक्स समेत 26 ऐसे प्लेटफॉर्म बंद कर दिए हैं, जो नेपाल में रजिस्टर्ड नहीं हैं। इस कदम से यूजर्स में नाराजगी और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इंस्टाग्राम जैसे पॉपुलर ऐप्स के लाखों यूजर्स नेपाल में हैं, जो मनोरंजन, खबरों और बिज़नेस के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं।
सोमवार को हुए प्रदर्शन की शुरुआत राष्ट्रगान गाकर हुई। इसके बाद जनरेशन Z के युवाओं ने राष्ट्रीय झंडे लहराते हुए सोशल मीडिया बैन और भ्रष्टाचार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी और संसद में घुस गये। छात्रों का कहना है कि हमें सोशल मीडिया बैन ने झकझोरा है, लेकिन असली वजह भ्रष्टाचार है, जो नेपाल की संस्थाओं तक में समा गया है। हम सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ खड़े हुए हैं। बदलाव जरूरी है, पुरानी पीढ़ियां चुप रहीं, लेकिन अब हमारी पीढ़ी इसे खत्म करेगी।
सोशल मीडिया बैन के बावजूद टिकटॉक नेपाल में चालू है। टिकटॉक पर ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें आम नागरिकों की परेशानियों की तुलना नेताओं के बच्चों की आलीशान जिंदगी से की जा रही है। प्रदर्शनकारी भूमिका भारती ने कहा कि दुनिया भर में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन हुए हैं और नेपाल सरकार को डर है कि यहां भी ऐसा हो सकता है।
सरकार ने पिछले महीने घोषणा की थी कि सभी प्रभावित कंपनियों को नेपाल में रजिस्टर्ड होना पड़ेगा, एक स्थानीय संपर्क कार्यालय बनाना होगा और शिकायत निवारण अधिकारी नियुक्त करना होगा। इसके लिए उन्हें सात दिन का समय दिया गया था। यह आदेश पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू किया गया।
रविवार को सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि वह विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करती है और इनके संरक्षण और उपयोग के लिए अनुकूल माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
नेपाल इससे पहले भी कई बार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगा चुका है। जुलाई 2025 में सरकार ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग बढ़ने का हवाला देते हुए टेलीग्राम को ब्लॉक कर दिया था। वहीं अगस्त 2024 में टिकटॉक पर नौ महीने का प्रतिबंध हटाया गया, जब कंपनी ने नेपाली नियमों का पालन करने पर सहमति जताई।