भरतपुर महाराजा और युवराज का घमासान: अनिरुद्ध ने जाट समाज को दी इतिहास पढ़ने की सलाह

भरतपुर। पूर्व भरतपुर रियासत के युवराज अनिरुद्ध सिंह और उनके पिता पूर्व मंत्री महाराजा विश्वेंद्र सिंह के बीच विरासत और वर्चस्व की जंग अब खुलकर सामने आ गई है। मोती महल पर शाही झण्डा उखाड़े जाने को लेकर उठे विवाद पर पहली बार युवराज अनिरुद्ध सिंह ने चुप्पी तोड़ी और समूचे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि के लिए अपने पिता को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने जाट समाज को इतिहास का आईना दिखाते हुए महाराजा सूरजमल की परंपराओं को जानने, पढ़ने और समझने की सलाह दी।

Sep 15, 2025 - 20:16
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भरतपुर महाराजा और युवराज का घमासान: अनिरुद्ध ने जाट समाज को दी इतिहास पढ़ने की सलाह
भरतपुर के महाराजा विश्वेंद्र सिंह और युवराज अनिरुद्ध सिंह।

बदला हुआ झंडा भी महाराजा सूरजमल का ही है

युवराज ने कहा कि मोती महल पर अब तक जो शाही ध्वज स्थापित था, वह  युद्ध का प्रतीक था, जिसे युद्ध प्रारंभ करने से पहले महल पर लगाया जाता था। उनका दावा है कि उन्होंने मोती महल पर जो पचरंगा झण्डा लगाया है, वह भी महाराजा सूरजमल का ही है। इस पर सवाल उठाए जाने पर युवराज ने कहा कि उनके पिता जाट समाज को निजी स्वार्थों के लिए बरगला रहे हैं।

शाही सम्पत्ति की बिक्री पर उठाए सवाल

युवराज ने तीखे लहजे में कहा कि जब आगरा के हरीपर्वत, भरतपुर हाउस, गोवर्धन और मथुरा आदि शहरों में शाही सम्पत्तियां कौड़ियों के भाव बेचे जा रहे थे, तब जाट समाज ने महाराजा से सवाल क्यों नहीं पूछा? जब महाराजा सूरजमल की सम्पत्ति खुर्द-बुर्द हो रही थी तब जाट समाज के रहनुमा कहां थे?

जाट समाज को दिया सीधा जवाब

21 अगस्त को जाट समाज द्वारा मोती महल पर शाही झण्डा स्थापित करने की घोषणा पर युवराज अनिरुद्ध सिंह ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, पहले महाराजा सूरजमल के समय से वंश का इतिहास पढ़ें, फिर ऐसे फैसले लें। उन्होंने जाट समाज द्वारा उनके बहिष्कार पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या जाट समाज सुप्रीम कोर्ट से बड़ा है, जो हर किसी का बहिष्कार करने लगेगा?

शाही धरोहरों की दुर्दशा और उपेक्षा

युवराज अनिरुद्ध सिंह ने आरोप लगाया कि जाट समाज के लोगों ने कभी शाही धरोहरों को बचाने की कोशिश नहीं की। महाराजा सूरजमल और उनके वंशजों द्वारा निर्मित अनेक महल खण्डहर हो चुके हैं। डीग महल स्थित शाही संग्रहालय से शाही प्रतिमा के गायब होने की घटना को भी उन्होंने गंभीरता से उठाया।

राजा मानसिंह की शहादत और पिता पर कटाक्ष

युवराज ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने उनके दादा राजा मानसिंह की हत्या कराई थी। इसके बावजूद उनके पिता विश्वेंद्र सिंह ने 1989 में मां महारानी दिव्या सिंह से हुए अपने विवाह समारोह में शिवचरण माथुर को आमंत्रित किया था। युवराज ने इसे पिता की दोहरी नीति बताते हुए कठोर टिप्पणी की।

अदालत का हवाला और प्रशासनिक अनुमति

युवराज ने स्पष्ट किया कि एसडीएम से लेकर जिलाधिकारी तक ने अपने आदेशों में उन्हें मोती महल में रहने की अनुमति दे दी है। यह प्रकरण फिलहाल उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में जाट समाज द्वारा 21 सितम्बर को झण्डा स्थापना आंदोलन की घोषणा को उन्होंने अनुचित करार दिया।

जाट समाज सच्चाई से दूर है

युवराज ने कहा कि जाट समाज के लोग शाही महल की वास्तविक सच्चाई से काफी दूर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन करने वाले लोग इतिहास और न्यायिक प्रक्रिया दोनों की अनदेखी कर रहे हैं।

SP_Singh AURGURU Editor