फतेहपुर मकबरा-मंदिर बवाल में 10 लोगों पर एफआईआर
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में मकबरा-मंदिर विवाद ने राजनीतिक रंग ले लिया है। मकबरे में पूजा करने के प्रयास के बाद तनाव बढ़ गया, जिसके चलते तोड़फोड़ भी हुई।
फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में मकबरा-मंदिर विवाद को लेकर राजनीति गर्माई हुई है। 11 अगस्त को हिंदू संगठनों से जुड़े कुछ लोग फतेहपुर के एक पुराने मकबरे में घुसे और वहां पूजा करने की कोशिश की। हिंदू संगठनों का दावा है कि यहां पहले मंदिर था, जिसे तोड़कर यह मकबरा बनाया गया है। इस दौरान मकबरे के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया गया। मामले को लेकर यूपी विधानसभा में भी भारी हंगामा हुआ। बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एक-दूसरे पर फतेहपुर की हिंसा को लेकर आरोप लगाए।
इस बीच एक विवाद उन नामों को लेकर भी है, जिनके ऊपर फतेहपुर हिंसा के इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। दरअसल, 12 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विधानसभा में फतेहपुर हिंसा को लेकर हुई कार्रवाई की जानकारी दी और बताया कि मामले में 10 नामजद सहित 160 लोगों के ऊपर नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, एफआईआर में दर्ज नामों के बारे में बताते हुए सुरेश खन्ना रुक गए। इसके बाद विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार हिंसा में शामिल लोगों के नाम छिपा रही है।
फतेहपुर पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। इनमें अभिषेक शुक्ला, आशीष त्रिवेदी, प्रसून तिवारी, ऋतिक पाल, धर्मेंद्र सिंह, अजय सिंह, विनय तिवारी, देवनाथ धाकड़े, पुष्पराज पटेल और पप्पू सिंह चौहान का नाम शामिल है। नामजद आरोपियों में ज्यादातर बीजेपी और बजरंग दल से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। वहीं, पप्पू सिंह समाजवादी पार्टी से थे, लेकिन मंगलवार को सपा ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया।
समाजवादी पार्टी से निकाले जाने के बाद पप्पू सिंह ने आरोप लगाया कि सपा केवल मुस्लिमों की पार्टी है। पप्पू सिंह ने अपना एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि वह लंबे समय से समाजवादी पार्टी में थे, लेकिन सपा ने उनके भरोसे को तोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह पार्टी केवल मुसलमानों की है और इसलिए वह सपा से इस्तीफा दे रहे हैं। पप्पू सिंह ने कहा कि वह एक हिंदू हैं और हमेशा सनातन धर्म के लिए लड़ते रहेंगे।