5,585 आवेदनों से निकला राम मंदिर का पहला सीईओ, पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा पर ट्रस्ट ने लगाई मुहर
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया है। उनके चयन के लिए करीब दो महीने तक चली प्रक्रिया में देशभर से 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। कई स्तरों की छंटनी, मूल्यांकन, ऑनलाइन संवाद और व्यक्तिगत साक्षात्कार के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया, जिसमें से ट्रस्ट ने जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगाई।
6 जुलाई को गठित हुई चयन समिति
सीईओ के चयन के लिए ट्रस्ट ने 6 जुलाई 2026 को तीन सदस्यीय खोज एवं चयन समिति बनाई थी। समिति में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और सेवानिवृत्त परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावड़े शामिल थे। औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े समीर पांडा को समिति का सचिव बनाया गया था। इस तरह चयन प्रक्रिया में न्यायिक, सैन्य और वैज्ञानिक-प्रशासनिक अनुभव को शामिल किया गया।
5,585 आवेदनों से शुरू हुआ चयन का सफर
सीईओ पद के लिए आवेदन की प्रक्रिया 18 जुलाई को पूरी हुई। निर्धारित योग्यता और मानकों के आधार पर आवेदनों की प्रारंभिक छंटनी की गई, जिसके बाद 1,580 उम्मीदवार अगले चरण के लिए योग्य पाए गए। उम्मीदवारों की पेशेवर पृष्ठभूमि, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन कौशल, संवाद क्षमता, तकनीकी समझ और बड़े स्तर की संस्थागत जिम्मेदारियां संभालने की क्षमता को चयन के दौरान परखा गया।
600 अंकों के ढांचे पर हुआ मूल्यांकन
बड़ी संख्या में उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग के लिए 600 अंकों का मूल्यांकन ढांचा तैयार किया गया था। इस प्रक्रिया के बाद चयन का दायरा लगातार सीमित किया गया। अगले चरण में 108 उम्मीदवारों को ऑनलाइन संवाद के लिए चुना गया। इसके बाद चयन प्रक्रिया व्यक्तिगत बातचीत और आमने-सामने मूल्यांकन तक पहुंची।
अयोध्या में 16 उम्मीदवारों का हुआ अंतिम आकलन
11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 16 उम्मीदवारों के साथ आमने-सामने बातचीत की गई। समिति ने इस दौरान उनके प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, संस्थागत प्रबंधन की समझ और राम मंदिर जैसे बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के संचालन को लेकर दृष्टिकोण को परखा। इस चरण के बाद तीन उम्मीदवारों का अंतिम पैनल तैयार किया गया।
75 पन्नों की रिपोर्ट के बाद अंतिम फैसला
चयन समिति ने करीब दो महीने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 1 सितंबर को ट्रस्ट को 75 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में तीन नामों की अनुशंसा की गई थी। अंतिम निर्णय का अधिकार ट्रस्ट के पास था। इसके बाद 2 सितंबर को हुई बैठक में ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का निर्णय लिया।
38 वर्ष से अधिक का सैन्य अनुभव
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया था। 38 वर्ष से अधिक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया और 18 से ज्यादा प्रकार के लड़ाकू, परिवहन विमान तथा हेलीकॉप्टर उड़ाए। वह पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अप्रैल 2026 में वे वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व
जितेंद्र मिश्रा के सैन्य करियर में ऑपरेशन सिंदूर भी महत्वपूर्ण अध्याय रहा। इस दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया। इससे पहले कारगिल युद्ध के दौरान भी वे ऐसे अभियानों से जुड़े रहे, जिनमें मिराज-2000 विमानों पर लेजर-गाइडेड बमों के इस्तेमाल को ऑपरेशनल बनाया गया था। सैन्य सेवा के दौरान उनके नेतृत्व और योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किए जाने का उल्लेख भी सामने आया है।
राम मंदिर की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच मिली कमान
राम मंदिर के पूर्णकालिक सीईओ के रूप में जितेंद्र मिश्रा के सामने बड़े स्तर की प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी। मंदिर में बढ़ती श्रद्धालु संख्या, धार्मिक आयोजनों का विस्तार, सुविधाओं का प्रबंधन, कर्मचारियों और विभिन्न व्यवस्थाओं का संचालन तथा सरकारी एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा रहेगा।
मंदिर प्रशासन को पेशेवर ढांचा देने की तैयारी
राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर से जुड़ी गतिविधियों का दायरा लगातार बढ़ा है। ऐसे में ट्रस्ट के सामने श्रद्धालु सुविधाओं, प्रशासनिक प्रबंधन, सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था और बड़े आयोजनों के संचालन को बेहतर ढंग से व्यवस्थित करने की चुनौती है। हजारों आवेदनों से शुरू हुई लंबी चयन प्रक्रिया के बाद पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को इसी प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।