सर्कस की जंजीरों से आज़ादी की उड़ान: 'नट हर्ड' ने पूरे किए स्वतंत्रता के दस साल

कभी सर्कस में पीड़ा का चेहरा रहे चार मासूम अब वाइल्डलाइफ एसओएश के हाथी संरक्षण केंद्र में स्वतंत्रता, देखभाल और दोस्ती की एक दशक लंबी यात्रा का उत्सव मना रहे हैं। आज इनकी आजादी के दस साल पूरे हो चुके हैं। 

May 16, 2025 - 13:40
 0
सर्कस की जंजीरों से आज़ादी की उड़ान: 'नट हर्ड' ने पूरे किए स्वतंत्रता के दस साल
मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण केंद्र में दस साल का जश्न मनाते हाथी।

-कभी मंच पर मजबूरी में करतब दिखाने वाले चार नन्हे हाथी, आज मना रहे हैं दोस्ती, देखभाल और आत्मसम्मान का जश्न

मथुरा। एक समय था जब इनकी आंखों में दर्द था, पांवों में बेड़ियां और दिन रात प्रदर्शन की मजबूरी, लेकिन आज, वही चार हाथी—कोकोनट, पीनट, वॉलनट और मैकडेमिया खुशहाल जीवन जी रहे हैं। वो जीवन जिसमें डर नहीं, दोस्ती है। ज़ोर से बजती सीटी नहीं, चहकती चिड़ियों की आवाज़ है। और मंच पर जबरन नचाए जाने की जगह है एक हरे-भरे जंगल में स्वतंत्रता।

वर्ष 2015 में महाराष्ट्र के एक सर्कस से इन्हें छुड़ाकर मथुरा स्थित वाइल्डलाइफ एसओएस के संरक्षण केंद्र लाया गया था। आज, ‘नट हर्ड’ के नाम से पहचाने जाने वाले ये हाथी पशु कल्याण की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक बन चुके हैं।

अतीत की टीस, वर्तमान की राहत

रेस्क्यू के समय ये चारों हाथी बहुत छोटे थे और वर्षों की उपेक्षा, भूख, चोट व मानसिक उत्पीड़न झेल चुके थे। मथुरा पहुंचना न सिर्फ उनके लिए, बल्कि देशभर के उन तमाम जानवरों के लिए आशा की किरण बन गया, जो आज भी पिंजरे में न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं।

प्रकृति की गोद में नई शुरुआत

आज नट हर्ड का हर सदस्य न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी बेहतर जीवन जी रहा है। कोकोनट अपनी मस्ती से सबका मन मोह लेती है, जबकि मैकडेमिया और वॉलनट की दोस्ती दिन-ब-दिन मजबूत होती जा रही है।
ये हाथी अब अपने दिन कीचड़ स्नान, ताजे फलों का आनंद और पूल में मस्ती करते हुए बिताते हैं—जैसे हर जीव को करना चाहिए।

खास जश्न, खास मेहमान

इन 10 वर्षों की उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए, वाइल्डलाइफ एसओएस ने ‘नट हर्ड’ के लिए एक भव्य फ्रूट फीस्ट आयोजित किया। तरबूज, पपीते, कद्दू, केले और ककड़ी से सजी थालियों में इन हाथियों को वो स्वाद मिला, जो शायद उन्होंने अपने बचपन में कभी नहीं चखा था।

मैकडेमिया ने जहां मीठे फलों का आनंद लिया, वहीं कोको और वॉली के लिए खास चावल-दलिया और फलों से बना केक तैयार किया गया, जिसे उन्होंने बेहद चाव से खाया।

संस्था की आवाज़ें

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, नट हर्ड की कहानी केवल चार हाथियों की नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है, जो करुणा और देखभाल से आता है।

डॉ. इलियाराजा, उप निदेशक, पशु चिकित्सा सेवाएं ने कहा, प्रत्येक हाथी की ज़रूरत अलग है, और हमने उनकी प्राकृतिक प्रवृत्तियों को बनाए रखते हुए उन्हें स्वस्थ जीवन देने का प्रयास किया है।

गीता शेषमणि, संस्था की सह-संस्थापक कहती हैं, इनकी आंखों में अब जो चमकहै, वो इस बात का सबूत है कि समय, स्पेस और स्नेह से हर घाव भरा जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor