ताज के पीछे गंदगी दिखाकर ‘तमाचा’ जड़ गई विदेशी महिला, शर्म बाकी है तो ये जगह साफ रखिए  

आगरा। "व्हेयर इज़ ताजमहल?" "दिस इज़ रियल इंडिया।" ताजमहल के पीछे दशहरा घाट की गंदगी देखकर पोलैंड की एक महिला और पुरुष पर्यटक ने जब यह दो शब्द कहे तो न सिर्फ कैमरे में बदबू, कूड़ा और लापरवाही दर्ज हुई, बल्कि आगरा के कई विभागों की कलई भी दुनिया के सामने खुल गई। वीडियो में महिला अपने चेहरे को ढंके दिख रही है, जैसे उसे उल्टी आ रही हो, और गंदगी के बारे में बता रही है, जहां जगह-जगह प्लास्टिक, गंदगी, सड़ांध और बदबू फैली है।

Jul 5, 2025 - 12:17
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ताज के पीछे गंदगी दिखाकर ‘तमाचा’ जड़ गई विदेशी महिला, शर्म बाकी है तो ये जगह साफ रखिए   
पोलैंड की महिला पर्यटन दशहरा घाट पर मुंह ढंके हुए।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है और इसी के साथ नगर निगम, आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए), पर्यटन विभाग और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) जैसी एजेंसियों की कार्यशैली पर तीखे सवाल उठने लगे हैं।

ताजमहल के पीछे की सच्चाई: सामने चमक, पीछे सड़ांध

ताजमहल को लेकर प्रशासन सजग दिखता है। आसपास के एरिया की सजावट तक पर ध्यान दिया जाता है, लेकिन उसकी पिछली दीवार से सटा दशहरा घाट पूरी तरह बदहाल है। यह वही घाट है जिसे ताजमहल के ऊपरी भाग से साफ देखा जा सकता है। हजारों पर्यटक यहां रोज पहुंचते हैं, मगर न नगर निगम की झाड़ू वहां जाती है, न सफाईकर्मी। स्थानीय निवासी बताते हैं कि सालों से दशहरा घाट को कूड़ाघर की तरह इस्तेमाल किया जाता रहा है। किसी अफसर ने आकर न झांका, न सुना।

आगरा विकास प्राधिकरण पर सवाल

एडीए हर साल ताजमहल के नाम पर करोड़ों का पथकर वसूलता है। सवाल यह है कि क्या इन करोड़ों में से कुछ हज़ार रुपये भी ताजमहल के पीछे सफाई पर खर्च नहीं हो सकते? प्राधिकरण सिर्फ टैक्स वसूलता है, सुविधा कुछ नहीं देता। दशहरा घाट को ताज परिसर का हिस्सा मानते तक नहीं। जबकि विदेशी पर्यटक वहां तक घूमते हैं और कैमरा घुमा कर पूरी दुनिया को बदहाल भारत दिखा देते हैं।

नगर निगम की तो इच्छाशक्ति ही नहीं दिखती

नगर निगम यमुना आरती स्थल के सामने तो यमुना में जन सहयोग से सफाई कराता है। वहीं से कैमरा मंगाकर फोटो जारी कर दिए जाते हैं। मगर दशहरा घाट की गंदगी पर इस विभाग का भी कोई ध्यान नहीं। क्या यह बहुत बड़ा काम है कि एक बार दशहरा घाट से कूड़ा उठवाकर वहां दो स्थायी सफाईकर्मी तैनात कर दिए जाएं, जो रोज की रोज कूड़ा उठाते रहें तो यह घाट हमेशा साफ सुथरा रखा जा सकता है।  यह कोई लाखों की योजना नहीं, सिर्फ इच्छाशक्ति की बात है।

पर्यावरणीय खतरे और ताजमहल पर असर

यमुना किनारे प्लास्टिक और गंदगी का जमाव, जल प्रदूषण का बड़ा कारण है। ताजमहल की नींव नमी आधारित है, यह प्रदूषण उसकी संरचना के लिए भी खतरनाक है। इसे लेकर पुरातत्व विभाग की चुप्पी भी सवालों के घेरे में आती है। पर्यटन विभाग, जिसे पर्यटकों की सुविधाओं पर ध्यान देना होता है, उसने भी संबंधित विभागों को दशहरा घाट की गंदगी के बारे में संबंधित विभागों को नहीं बताया।

क्या अब भी कोई जागेगा?

विदेशी महिला पर्यटक द्वारा वायरल किए गए इस वीडियो के बाद भी यह सवाल अभी बाकी है कि क्या किसी विदेशी को वीडियो बनाकर हमारी गंदगी दिखानी पड़ेगी, तब ही अफसर उठेंगे? क्या सफाई सिर्फ कैमरों के सामने होगी? क्या दशहरा घाट भारत का 'वास्तविक चेहरा' बनकर यूं ही दुनिया में वायरल होता रहेगा?

SP_Singh AURGURU Editor