चार महिला अफसर भी नहीं बनीं पीड़िता की आवाज़, आरोपी अफसर को बचाने की कीमत निलंबन से चुकाई
मथुरा। राज्य कर विभाग मथुरा में यौन शोषण के गंभीर मामले ने तब और चौंका दिया जब चार महिला अधिकारियों सहित छह सदस्यीय आंतरिक परिवाद समिति (विशाखा) ने पीड़िता की गुहार को दरकिनार कर आरोपी डिप्टी कमिश्नर कमलेश पांडेय को बचाने की कोशिश की। विभाग ने इसे कर्तव्यच्युत आचरण मानते हुए जांच कमेटी में शामिल सभी छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
यह मामला इसलिए भी विशेष ध्यानाकर्षण का कारण बना है क्योंकि जांच समिति में महिला अधिकारियों का बहुमत होते हुए भी उन्होंने महिला पीड़िता के पक्ष में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। अब इस प्रकरण की पुनः जांच के लिए राज्य कर विभाग ने विशेष सचिव कृतिका ज्योत्सना को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
कौन-कौन हुए निलंबित?
कोमल छाबड़ा, सहायक आयुक्त (सचल दल इकाई-2)।
प्रतिभा, उपायुक्त (विशेष अनुसंधान शाखा)।
पूजा गौतम, सहायक आयुक्त (राज्य कर खंड-2)।
सुनीता देवी, राज्य कर अधिकारी (खंड-3)।
वीरेन्द्र कुमार, उपायुक्त (खंड-3)।
संजीव कुमार, उपायुक्त (राज्य कर खंड-5)।
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने आरोपी अधिकारी के पक्ष में जांच को प्रभावित किया और पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया।
क्या है मामला?
डिप्टी कमिश्नर कमलेश पांडेय पर एक अधीनस्थ महिला कर्मचारी ने यौन शोषण और अमर्यादित व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए थे। मामले की जांच विशाखा समिति को सौंपी गई थी, लेकिन समिति की कार्यप्रणाली ही सवालों के घेरे में आ गई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद कमलेश पांडेय को निलंबित कर उन्हें संयुक्त आयुक्त कार्यालय, बांदा से संबद्ध कर दिया गया है।
अब नई जांच अधिकारी बनीं विशेष सचिव कृतिका ज्योत्सना
राज्य कर विभाग ने निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए समिति को भंग कर जांच का जिम्मा एक वरिष्ठ महिला अधिकारी कृतिका ज्योत्सना को सौंपा है। उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे पीड़िता को न्याय दिलाने में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतेंगी।
इस प्रकरण ने नौकरशाही के भीतर लैंगिक पक्षपात, शक्ति संरचना और आंतरिक समितियों की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जब खुद महिला अधिकारी ही महिला पीड़िता का पक्ष न लें, तो संस्थागत न्याय व्यवस्था की वैधता पर संकट खड़ा हो जाता है।