कॉन्सेप्ट से वास्तविकता तक: वर्चुअल लैब्स, एआई और सिमुलेशन आधारित शिक्षा ने बदली तकनीकी सीखने की दिशा, दयालबाग शिक्षण संस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठी और हैकाथॉन का आयोजन

आगरा। डिजिटल युग में तकनीकी शिक्षा को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और भविष्योपयोगी बनाने की दिशा में दयालबाग शिक्षण संस्थान के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी कॉन्सेप्ट से वास्तविकता की यात्रा (कॊन्सेप्ट टू रियलिटी) का आयोजन विचारोत्तेजक और नवाचार से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। संगोष्ठी में वर्चुअल लैब्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, माइक्रो-फ्लूडिक्स तथा सिमुलेशन आधारित शिक्षण प्रणालियों पर देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और विशेषज्ञों ने गहन विमर्श किया।

Feb 8, 2026 - 20:01
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कॉन्सेप्ट से वास्तविकता तक: वर्चुअल लैब्स, एआई और सिमुलेशन आधारित शिक्षा ने बदली तकनीकी सीखने की दिशा, दयालबाग शिक्षण संस्थान में राष्ट्रीय संगोष्ठी और हैकाथॉन का आयोजन
दयालबाग शिक्षण संस्थान में आयोजित कॊन्सेप्ट टू रियलिटी विषयक संगोष्ठी में मौजूद अतिथिगण।

संगोष्ठी में उपस्थित छात्र-छात्राएं।

संगोष्ठी का शुभारंभ संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन संबोधन में उन्होंने कहा कि वर्चुअल लैब्स ने शिक्षा को भौतिक संसाधनों और सीमाओं से मुक्त कर दिया है। आज छात्र बिना महंगे उपकरणों के भी उच्चस्तरीय प्रयोगशालाओं का अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य छात्रों में प्रयोग, विश्लेषण और नवाचार की क्षमता विकसित करना है, और वर्चुअल लैब्स इस दिशा में एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी हैं।

माइक्रो-फ्लूडिक्स और वर्चुअल प्रयोग

आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर अमित अग्रवाल ने माइक्रो-फ्लूडिक्स जैसे जटिल और उन्नत विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि पारंपरिक प्रयोगशालाओं में संसाधनों की सीमाओं के कारण ऐसे प्रयोग छात्रों के लिए कठिन हो जाते हैं। वर्चुअल लैब्स और सिमुलेशन आधारित प्लेटफॉर्म इन प्रक्रियाओं को दृश्य, संवादात्मक और बार-बार दोहराने योग्य बनाते हैं, जिससे छात्र अवधारणाओं को गहराई से समझ पाते हैं और बिना जोखिम प्रयोग कर सीख सकते हैं।

एआई और स्मार्ट एजुकेशन

आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर रंजन बोस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एआई और वर्चुअल लैब्स का समन्वय शिक्षा को अधिक स्मार्ट और परिणामोन्मुख बना रहा है। एआई आधारित प्रणालियां छात्रों की सीखने की गति और कमजोरियों का विश्लेषण कर प्रयोगों को उसी अनुरूप ढाल सकती हैं, जिससे शिक्षा अधिक पर्सनलाइज्ड हो रही है।

समान अवसरों की शिक्षा

आईआईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर वेंकटेश चोप्पेला ने कहा कि वर्चुअल लैब्स ने तकनीकी शिक्षा में समानता स्थापित की है। अब ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के छात्र भी वही प्रयोगात्मक अनुभव प्राप्त कर रहे हैं, जो पहले केवल चुनिंदा संस्थानों तक सीमित थे। उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर पर कौशल विकास की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया।

कोविड काल में वर्चुअल लैब्स की भूमिका

वक्ताओं ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जब शैक्षणिक संस्थान बंद थे, तब वर्चुअल लैब्स ने व्यावहारिक शिक्षा को बाधित नहीं होने दिया। छात्रों ने घर बैठे प्रयोग कर अपनी तकनीकी दक्षता को बनाए रखा, जिससे वर्चुअल लैब्स भविष्य की शिक्षा व्यवस्था का अभिन्न अंग बन गई हैं।

दयालबाग X वर्चुअल लैब हैकाथॉन–2026

संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित दयालबाग X वर्चुअल लैब हैकाथॉन–2026 में देशभर से 150 से अधिक टीमों ने भाग लिया। प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद छह टीमों का चयन फाइनल के लिए किया गया, जिनमें से तीन टीमों को विजेता घोषित किया गया।

विजेता टीमें

प्रथम पुरस्कार: टीम बगबस्टर्स – जयपी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, नोएडा। परियोजना: ओपन इनोवेशन – मॉडर्न फिजिक्स वर्चुअल लैब।

द्वितीय पुरस्कार: टीम प्रोटोमाइंड्स – दयालबाग शिक्षण संस्थान, आगरा। परियोजना: फसल जल तनाव अनुकरण एवं अनुकूली सिंचाई अनुसूचक

तृतीय पुरस्कार: टीम दरुकाX – सिटी इंजीनियरिंग कॉलेज, बेंगलुरु। परियोजना: इंटेलिजेंट फायरफाइटिंग रोबोट के लिए वर्चुअल लैब।

हैकाथॉन के निर्णायक मंडल में डॉ. विरेंद्र रमेश कोली, डॉ. संदीप साहू (आईआईटी मंडी), डॉ. रजत कुमार एवं डॉ. स्वाति सत्संगी शामिल रहे। निर्णायकों ने प्रतिभागियों की तकनीकी समझ, नवाचार क्षमता और प्रस्तुति कौशल की सराहना की।

फैकल्टी और छात्रों की सक्रिय भूमिका

इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में 200 से अधिक छात्र एवं शिक्षक शामिल हुए। दयालबाग शिक्षण संस्थान के 14 फैकल्टी सदस्यों ने अपनी विकसित वर्चुअल लैब्स की प्रस्तुतियां दीं। आयोजन में छात्रों का उत्साह, अनुशासन और तकनीकी दक्षता विशेष रूप से सराहनीय रही।

समापन सत्र में फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रोफेसर डी. के. चतुर्वेदी ने कहा कि वर्चुअल लैब्स, एआई और सिमुलेशन आधारित शिक्षा छात्रों को वास्तविक औद्योगिक एवं सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए तैयार कर रही है। उन्होंने भविष्य में भी ऐसे नवाचार आधारित आयोजनों को निरंतर आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं वर्चुअल लैब्स हैकाथॉन–2026 का समापन दयालबाग शिक्षण संस्थान की पारंपरिक कॉलेज प्रार्थना के साथ अत्यंत गरिमामय और प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुआ।

SP_Singh AURGURU Editor