कोलकाता की तंग गलियों से आगरा पुलिस ने लिखा साहस, रणनीति और तकनीक का विजय अध्याय
आगरा। धर्मांतरण जैसे संवेदनशील और बहुस्तरीय अपराध की तह तक पहुंचना, फिर उसमें फंसीं युवतियों को बंगाल के कोलकाता जैसे शहर में जाकर बिना किसी व्यवधान के सकुशल वापस लाना...,यह कोई सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं थी। यह रणनीति, तकनीक, संयम और प्रशिक्षण का अद्वितीय समागम था, जिसे आगरा पुलिस ने अंजाम दिया और देशभर में यह केस एक मिसाल बन गया।
– बंगाल जैसे राज्य में जाकर धर्मांतरण गैंग का पर्दाफाश और आगरा की दोनों बहनों को सकुशल लाना किसी चुनौती से कम नहीं था
विशेषज्ञता से सजी स्पेशल टीम और चुनिंदा अधिकारी
धर्मांतरण गैंग के पीछे पहुंचने के लिए आगरा के पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने जिन अधिकारियों की टीम बनाई, वह साधारण नहीं थी। इंस्पेक्टर राजीव त्यागी, जो एटीएस व अंडरकवर अभियानों के लिए पहले से पहचाने जाते हैं, उन्हें इस ऑपरेशन में प्रमुख भूमिका दी गई।
आईआईटी से पढ़े अपर पुलिस आयुक्त अरीब अहमद, तकनीकी विश्लेषण के लिए टीम का दिमाग बने। साइबर एक्सपर्ट रीता यादव ने डिजिटल लोकेशन ट्रेसिंग में कमाल किया, वहीं अंकुर मलिक की सर्विलांस में महारत ने टीम को बारीक से बारीक संकेत तक पहुंचाया।
कोलकाता ऑपरेशन: जहां कानून से पहले रणनीति बनाई गई
जब पुलिस को पुख्ता सूचना मिली कि आगरा से लापता बहनें कोलकाता की मुस्लिम बस्ती में हैं, तब तक यह समझ आ चुका था कि सामान्य कार्रवाई नाकाफी होगी। वजह साफ थी- बंगाल की राजनीतिक और पुलिसिया प्रतिरोध की पृष्ठभूमि। ऐसे मामलों में पहले भी केंद्रीय एजेंसियों को कई बार रोका जा चुका था।
यही सोचकर आगरा पुलिस कमिश्नर ने कोलकाता रवाना होने वाली टीम को एक सप्ताह की विशेष ट्रेनिंग दी। हर सदस्य को बटन कैमरा, पेन कैमरा और कैप कैमरा से लैस किया गया। टीम को कोर्ट प्रोसिजर तक सिखाए गए कि ट्रांजिट रिमांड कैसे लेना है, किन हाईकोर्ट रूलिंग का हवाला देना है। कारण यह भी था कि इस ऑपरेशन का एक अभियुक्त अली हसन उर्फ शेखर रॉय, वहीं की अदालत में कर्मचारी था।
किराए का मकान की तलाश और लाइव ऑपरेशन
आगरा की टीम पांच दिन तक उस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में किराए के मकान की तलाश के नाम पर सक्रिय रही। वहां बस्ती में धीरे-धीरे घुलते हुए उन्होंने अपनी योजना को अंजाम दिया। कार्रवाई के हर क्षण को आगरा में वरिष्ठ अधिकारी लाइव देख रहे थे। जब सही समय आया, तो बहनों को मुक्त कराया गया और तीन प्रमुख आरोपी भी पकड़ लिए गए।
न्यायिक तैयारी भी पूरी थी
पुलिस टीम को भेजने से पहले उन्हें कोर्ट में पैरवी की तैयारी तक कराई गई। टीम को पता था कि अली हसन उर्फ शेखर रॊय स्थानीय दबदबे वाला व्यक्ति है, इसलिए टीम को संभावित हर दलील, हर दस्तावेज और हर प्रक्रिया का अभ्यास कराया गया था।
नतीजा: बिना किसी टकराव के, ऑपरेशन पूरा
सारी रणनीति और प्रशिक्षण का परिणाम रहा कि आगरा पुलिस बिना किसी स्थानीय विरोध या कानूनी अड़चन के अपना मिशन सफल कर पाई। न केवल दोनों बहनों को सुरक्षित वापस लाया गया, बल्कि धर्मांतरण गैंग की संरचना, नेटवर्किंग और उसकी कार्यशैली को भी उजागर किया गया।