स्थल से सभ्यता तक: आगरा विश्वविद्यालय में पुरातत्व कार्यशाला ने खोले इतिहास के नए द्वार
आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के इतिहास एवं संस्कृति विभाग द्वारा क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, आगरा के सहयोग से स्थल से सभ्यता तक: मैदानी पुरातत्व की भूमिका’ विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशु रानी के निर्देशन में हुआ, जिसमें देश के जाने-माने पुरातत्वविदों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और छात्रों ने भाग लिया।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता एकेडमी फॉर आर्कियोलॉजिकल रिसर्च एंड ट्रेनिंग, विदिशा, म.प्र. के निदेशक डॉ. एस.वी. ओटा ने पुरातत्व की वैज्ञानिक प्रक्रिया, उत्खनन विधियों और मानव इतिहास को समझने की क्रमिक यात्रा पर सारगर्भित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, इतिहास केवल अतीत नहीं, बल्कि भविष्य का दर्पण है। समाज, संस्कृति, विज्ञान और दर्शन जैसे सभी विषय इतिहास से गहराई से जुड़े हैं।
कार्यक्रम में पुरातत्व विभाग, लखनऊ के प्रभारी ज्ञानेश कुमार रस्तोगी के निर्देशन में उत्तर प्रदेश के प्रमुख उत्खनन स्थलों से संबंधित दृश्य प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे छात्रों ने अत्यंत उत्सुकता के साथ देखा। प्रदर्शनी में प्राप्त प्राचीन अवशेषों, स्थलचित्रों और उत्खनन रिपोर्ट्स ने दर्शकों को मैदानों में छिपे इतिहास की झलक दिखाई।
विभागाध्यक्ष प्रो. बी.डी. शुक्ला ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि इतिहास हमारे अस्तित्व की जड़ है। इसके अध्ययन से हम न केवल अपने अतीत को समझते हैं, बल्कि देश के भविष्य निर्माण में भी सहभागी बनते हैं।
वक्ताओं ने ऐतिहासिक शोध, पुरातात्विक अन्वेषण की क्षेत्रीय संभावनाएं और युवाओं के लिए इसके बदलते स्वरूप पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे तकनीकी दक्षता के साथ भारतीय विरासत के अनछुए पहलुओं को उजागर करने में अग्रसर हों।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. हेमंत कुमार ने किया, जिनकी व्यवस्था में समस्त गतिविधियां निर्विघ्न संपन्न हुईं। कार्यशाला में डॉ. स्मिथा एस. कुमार, डॉ. अल्का सिंह, प्रो. हेमा पाठक, डॉ. अमित कुमार, डॉ. गोपाल वशिष्ठ, डॉ. जितेन्द्र, आकांक्षा रॉय चौधरी, शशि भूषण, देवेंद्र मौर्य, रवीश कुमार, पूजा पोरस, गिरधर मिश्रा और ऋतिक प्रताप की गरिमामयी उपस्थिति रही।