ट्रक हादसे से आज़ादी तक: घायल हाथी ‘भोला’ की 15 साल की जंग और जीत की प्रेरक कहानी

नोएडा में हाईवे पर हुए दर्दनाक ट्रक हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर मौत से जूझ रहे हाथी भोला को जब वाइल्डलाइफ एसओएस ने रातों-रात बचाया था, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह पीड़ित, थका हुआ और आंशिक रूप से नेत्रहीन मखना हाथी अपनी आज़ादी के 15 साल पूरे कर दुनिया को आत्मविश्वास और द्रढ़ता का नया संदेश देगा।

Nov 14, 2025 - 20:44
 0
ट्रक हादसे से आज़ादी तक: घायल हाथी ‘भोला’ की 15 साल की जंग और जीत की प्रेरक कहानी
वाइल्डलाइफ एसओएस के हाथी संरक्षण केंद्र पर अपनी आजादी के 15 साल पूरे करने पर खुशहाल हाथी भोला।

आगरा। पंद्रह साल पहले नोएडा के एक हाईवे पर हुए ट्रक एक्सीडेंट ने 60 वर्षीय हाथी भोला के जीवन की दिशा हमेशा के लिए बदल दी। वर्षों तक क्रूरता, जंजीरों और जबरन भीख मांगने जैसे अमानवीय व्यवहार को सहने के बाद जब 2010 की रात उसे अवैध रूप से राज्य की सीमाओं के पार ले जाया जा रहा था, तभी तेज़ रफ्तार ट्रक की चपेट में आकर वह घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा।
उस समय आंशिक रूप से नेत्रहीन और कमजोर भोला को बचाने की जिम्मेदारी वाइल्डलाइफ एसओएस और उत्तर प्रदेश वन विभाग ने उठाई। इसी क्षण से उसकी आज़ादी की वास्तविक यात्रा शुरू हुई।

क्रूरता से भरे अतीत की कहानी

भोला का अतीत दर्दनाक रहा। बुलहुक से पीटना, तपती धूप और बारिश में जंजीरों से बंधे रहना, और गाँव-गाँव घूमकर भीख माँगने को मजबूर किया जाना उसके जीवन का हिस्सा था। उसकी बढ़ती उम्र और कमजोर होती दृष्टि के बावजूद उसे लगातार अत्याचार झेलना पड़ता था।

उपचार, देखभाल से यूं बदला जीवन

बचाव के बाद भोला को मथुरा के हाथी संरक्षण एवं देखभाल केंद्र लाया गया, जहां उसकी चिकित्सा, पोषण और पुनर्वास का नया अध्याय शुरू हुआ।
आज भोला शांत, निडर और आत्मविश्वासी है। वह सुबह की सैर करता है, अपने पूल में पानी में खेलता है और केले, कद्दू, गन्ना और तरबूज जैसे पसंदीदा फलों का आनंद लेता है।
भोला के 15 वर्ष पूरे होने पर वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा विशेष भोज भी आयोजित किया गया, जो न केवल उसके स्वस्थ जीवन की खुशी है, बल्कि यह संदेश भी कि सम्मानजनक जीवन हर जीव का अधिकार है।

विशेषज्ञों ने बताया- भोला क्यों है प्रेरणा

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, भोला का जीवन बताता है कि क्रूरता की जगह देखभाल जीवन बदल सकती है। उसकी यात्रा हजारों उन हाथियों के लिए प्रेरणा है, जो अभी भी ऐसी ही पीड़ा झेल रहे हैं।

सह-संस्थापक व सचिव गीता शेषमणि ने याद करते हुए कहा, जब भोला हमारे पास आया था, वह अत्यंत कमजोर, थका हुआ और डरा हुआ था। आज उसका आत्मविश्वास बताता है कि धैर्य और संवेदना से हर जीवन फिर से संवर सकता है।

पशु चिकित्सा सेवाओं के उप निदेशक डॉ. इलियाराजा ने बताया कि भोला को आज भी नियमित उपचार, औषधीय फुट बाथ और घाव की देखभाल की आवश्यकता है। सकारात्मक कंडीशनिंग का उस पर गहरा प्रभाव हुआ है और अब उसे उन हाथों पर भरोसा है, जिन्होंने उसका जीवन बचाया।

SP_Singh AURGURU Editor