आगरा में जर्मन शेफर्ड कुत्ते को मुंह बांधकर सड़क पर छोड़ गया मालिक, कैस्पर्स होम ने बचाया

आगरा। विदेशी नस्ल के कुत्ते पालना अब शहर में स्टेटस सिंबल बन चुका है, लेकिन जब यही शौक जिम्मेदारी में बदलता है तो कई मालिक बेरहमी की हद पार कर देते हैं। ताजा मामला रविवार रात का है, जब वॉटर वर्क्स चौराहे पर एक जर्मन शैफर्ड कुत्ते को मुंह बांधकर मरने के लिए छोड़ दिया गया। यह घटना न केवल पशु क्रूरता की पराकाष्ठा है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।

Mar 24, 2026 - 21:38
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आगरा में जर्मन शेफर्ड कुत्ते को मुंह बांधकर सड़क पर छोड़ गया मालिक, कैस्पर्स होम ने बचाया
सड़क पर अनाथ छोड़ा गया जर्मन शेफर्ड डॊग।

रविवार रात करीब 11:30 बजे कैस्पर्स होम की चेयरपर्सन विनीता अरोड़ा को सूचना मिली कि एक विदेशी नस्ल का कुत्ता सड़क पर तड़प रहा है। मौके पर पहुंचने से पहले उन्होंने हर संभव मदद के लिए संपर्क साधा, लेकिन न तो कोई बचाव दल पहुंचा, न ही हाल ही में शुरू हुई एम्बुलेंस सेवा सक्रिय हुई और न ही 112 से कोई प्रतिक्रिया मिली।

आधी रात में ऐसे बची जान

आखिरकार डॉ. नेहरू, उनके स्टाफ और एक स्थानीय दयालु परिवार की मदद से कुत्ते को आधी रात के बाद बचाया गया। परिवार के सदस्यों ने उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉ. नेहरू ने पूरी रात उसकी देखभाल की। बाद में कैस्पर्स होम के सहयोगी ऋषभ उसे शेल्टर लेकर पहुंचे।

तीसरी बार दोहराई गई दरिंदगी

विनीता अरोड़ा के मुताबिक, यह तीसरी घटना है जब जर्मन शैफर्ड नस्ल के कुत्ते को उसके पैर और मुंह बांधकर सड़क पर फेंका गया है। उन्होंने कहा कि यह सोचकर ही रूह कांप जाती है कि कोई मालिक अपने पालतू को तड़प-तड़प कर मरते देखने के लिए छोड़ सकता है।

शौक के आगे जिम्मेदारी शून्य

एक तरफ लोग विदेशी नस्ल के कुत्तों पर लाखों रुपये खर्च करते हैं, वहीं दूसरी तरफ भारतीय नस्ल के कुत्तों को नजरअंदाज, प्रताड़ित और विस्थापित किया जाता है। हालात यह हैं कि कैस्पर्स होम शेल्टर में इस समय 16 से अधिक रेस्क्यू किए गए पालतू जानवर हैं, जिनमें 5 जर्मन शैफर्ड शामिल हैं, जिन्हें उनके मालिकों ने छोड़ दिया।

अवैध ब्रीडिंग बना बड़ा कारण

विनीता अरोड़ा ने पशु चिकित्सा विभाग से मांग की है कि डॉग ब्रीडर्स और विक्रेताओं के लिए लाइसेंस अनिवार्य किया जाए। विदेशी नस्ल के कुत्तों का पंजीकरण और माइक्रोचिपिंग सुनिश्चित हो। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध और अपंजीकृत ब्रीडर्स मिक्स्ड नस्ल के पिल्ले बेचकर लोगों को धोखा दे रहे हैं, जिससे हजारों कुत्तों का जीवन बर्बाद हो रहा है।

अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में विदेशी नस्ल के कुत्ते कूड़ेदानों और सड़कों पर बेसहारा घूमते नजर आएंगे। यह सिर्फ पशु क्रूरता नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन का आईना है।

SP_Singh AURGURU Editor