सरकार ने चार संहिताओं को लागू किया, गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी तय होगी

सरकार ने चार श्रम संहिताओं को लागू कर दिया है। इससे 29 पुराने कानून सरल हो गए हैं। गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा। हर क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी तय होगी और उसका भुगतान समय पर होगा। यह कदम श्रमिकों को सशक्त बनाएगा और देश की आर्थिक तरक्की को तेज करेगा।

Nov 21, 2025 - 20:47
Nov 21, 2025 - 20:50
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सरकार ने चार संहिताओं को लागू किया, गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम मजदूरी तय होगी

नई दिल्‍ली। सरकार ने शुक्रवार को ऐतिहासिक फैसला लिया है। उसने चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। इन संहिताओं के जरिए 29 पुराने श्रम कानूनों को एक साथ मिलाकर सरल बनाया गया है। इस बड़े बदलाव से गिग वर्कर्स (अल्पकालिक अनुबंध पर काम करने वाले) को भी सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। सभी कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र (एपॉइंटमेंट लेटर) देना अनिवार्य होगा। हर क्षेत्र में न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। इसका भुगतान समय पर होगा। यह कदम देश के श्रमिकों को सशक्त बनाने और भारत की आर्थिक तरक्की को तेज करने के लिए उठाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि ये कोड हमारे लोगों, खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए एक मजबूत नींव का काम करेंगे। इनसे सबको सामाजिक सुरक्षा मिलेगी, मजदूरी समय पर मिलेगी, काम करने की जगह सुरक्षित होगी और बेहतर मौके मिलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि यह श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करेगा। भारत की आर्थिक रफ्तार को मजबूत करेगा। यह भविष्य के लिए एक ऐसा माहौल बनाएगा जो रोजगार बढ़ाने, उत्पादकता बढ़ाने और विकसित भारत की ओर हमारी यात्रा को तेज करेगा।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस सुधार को आजादी के बाद से अब तक के सबसे बड़े और प्रगतिशील श्रम-उन्मुख सुधारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह हमारे श्रमिकों को बहुत ज्‍यादा ताकत देगा। साथ ही, यह नियमों का पालन करना भी आसान बनाएगा और 'कारोबारी सुगमता' को बढ़ाएगा।

श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि चारों श्रम संहिताओं को अधिसूचित कर दिया गया है। अब ये पूरे देश के लिए कानून बन गई हैं। उन्होंने कहा कि ये संहिताएं रोजगार को एक व्यवस्थित रूप देंगी, श्रमिकों के संरक्षण को मजबूत करेंगी और काम करने के माहौल को सरल, सुरक्षित और दुनिया के साथ तालमेल बैठाने वाला बनाएंगी।

इन सुधारों में कई नई व्यवस्थाएं शामिल हैं। जैसे, राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी तय की जाएगी। महिलाओं और पुरुषों के लिए काम की नीतियां समान होंगी। नियमों का पालन कराने के लिए 'इंस्पेक्टर-सह-सुविधाकर्ता' मॉडल अपनाया जाएगा। दो सदस्यों वाले न्यायाधिकरण के जरिए विवादों का तेजी से निपटारा होगा। साथ ही, राष्ट्रीय व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य (ओएसएच) बोर्ड का गठन किया जाएगा।

सरकार अब इन संहिताओं के लिए विस्तृत नियम और योजनाएं बनाने के लिए लोगों से बातचीत शुरू करेगी। तब तक जहां जरूरत होगी, पुराने श्रम कानूनों के प्रावधान लागू रहेंगे। यह ध्यान देने योग्य है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा 2015 में 19% था, जो 2025 तक 64% से ज्‍यादा हो जाएगा।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि श्रम नियमों को आधुनिक बनाकर, श्रमिकों के कल्याण को बढ़ाकर और बदलते काम के माहौल के साथ तालमेल बैठाकर यह कदम भविष्य के लिए तैयार कार्यबल और मजबूत उद्योगों की नींव रखता है। इस कदम से 'आत्मनिर्भर भारत' के लिए श्रम सुधारों को गति मिलेगी।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत के कई श्रम कानून आजादी से पहले और आजादी के शुरुआती दौर (1930 से 1950 के दशक तक) में बनाए गए थे। उस समय अर्थव्यवस्था और काम करने का माहौल आज से बहुत अलग था। बयान में कहा गया कि दुनिया की ज्‍यादातर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने हाल के दशकों में अपने श्रम नियमों को समय के साथ बदला है। लेकिन, भारत अभी भी 29 केंद्रीय श्रम कानूनों में बिखरे हुए, जटिल और पुराने प्रावधानों के साथ काम कर रहा था।

मंत्री मनसुख मांडविया ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'मोदी सरकार की गारंटी: हर श्रमिक को सम्मान! आज से देश में नई श्रम संहिताएं प्रभावी कर दी गई हैं।'

क्‍या होंगे बड़े फायदे?
मंत्री ने बताया कि ये संहिताएं सभी श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी की गारंटी देंगी। युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। महिलाओं को समान वेतन और सम्मान मिलेगा। 40 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। एक साल काम करने के बाद तय अवधि वाले कर्मचारियों को ग्रेच्युटी मिलेगी। 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों को मुफ्त वार्षिक स्वास्थ्य जांच मिलेगी। ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन मिलेगा। खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को 100% स्वास्थ्य सुरक्षा मिलेगी। श्रमिकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सामाजिक न्याय मिलेगा।

उन्होंने कहा, 'ये सुधार साधारण बदलाव नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कार्यबल के कल्याण के लिए उठाया गया बड़ा कदम हैं। ये सुधार 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। 2047 तक ये विकसित भारत के लक्ष्य को रफ्तार देंगे।'

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत गिग कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिलेगी। सभी श्रमिकों को पीएफ, ईएसआईसी, बीमा और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ मिलेंगे।

वेतन संहिता, 2019 के तहत सभी श्रमिकों को वैधानिक न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। न्यूनतम मजदूरी और समय पर भुगतान वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे।

ईएसआईसी का विस्तार और लाभ पूरे भारत में लागू होंगे। 10 से कम कर्मचारियों वाली इकाइयों के लिए यह स्वैच्छिक होगा। लेकिन, खतरनाक प्रक्रियाओं में शामिल इकाइयों के लिए यह अनिवार्य होगा। अब एक तय अवधि के लिए नियुक्ति पाने वाले कर्मचारियों (फिक्स्ड-टर्म एम्प्लॉईज) को स्थायी श्रमिकों के समान सभी लाभ मिलेंगे। इनमें अवकाश, चिकित्सा और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।

इन संहिताओं में पहली बार 'गिग कार्य', 'प्लेटफॉर्म कार्य' जैसी कंपनियों के लिए काम करने वाले) और 'एग्रीगेटर्स' को परिभाषित किया गया है। पौधरोपण श्रमिकों को ओएसएचडब्ल्यूसी संहिता और सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत लाया जाएगा।

डिजिटल और ध्वनि-दृश्य श्रमिक अब पूर्ण लाभों के हकदार होंगे। इनमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार, डबिंग कलाकार और स्टंट करने वाले शामिल हैं।

यह एक बड़ा कदम है जो भारत के श्रम कानूनों को आधुनिक बनाने और श्रमिकों के जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में उठाया गया है। इन संहिताओं का उद्देश्य काम करने के माहौल को बेहतर बनाना, श्रमिकों को अधिक सुरक्षा प्रदान करना और देश की आर्थिक ग्रोथ को रफ्तार देना है।