जीएसटी दुरुपयोग, दंडात्मक कार्रवाइयों और दर वृद्धि जूता उद्योग के लिए घातक

आगरा। द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन ने बुधवार को जीएसटी कार्यालय आगरा में एक प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-1) पंकज गांधी को व्यापारियों की समस्याओं को लेकर एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। फेडरेशन ने जीएसटी व्यवस्था को लेकर पांच प्रमुख मुद्दे उठाए, जिनके चलते आगरा का घरेलू जूता उद्योग और अन्य व्यापारी वर्ग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

May 21, 2025 - 21:16
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जीएसटी दुरुपयोग, दंडात्मक कार्रवाइयों और दर वृद्धि जूता उद्योग के लिए घातक
जीएसटी कमिश्नर ग्रेड-1 को प्रतिवेदन सौंपते द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सामा एवं अन्य।  

-जीएसटी की जटिलताओं को लेकर द आगरा शू फैक्टर्स फेडरेशन ने जीएसटी कमिश्नर ग्रेड-1 के समक्ष रखीं पांच अहम मांगें

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि विभागीय तंत्र में अनावश्यक दंड, जीएसटी नंबर के दुरुपयोग, बार-बार सर्वे और दर वृद्धि के कारण व्यापारिक असुरक्षा और अविश्वास का वातावरण बन गया है।

प्रथम विक्रेता को दंड अनुचित

फेडरेशन के प्रतिवेदन में कहा गया है कि निर्दोष व्यापारी को दंडित किया जाना अनुचित है। यदि किसी चेन में अंतिम विक्रेता कर जमा नहीं करता तो पहले विक्रेता को भी दंडित कर दिया जाता है, जबकि उसका कोई दोष नहीं होता। फेडरेशन ने इसे अन्यायपूर्ण और दमनकारी नीति करार दिया।

जीएसटी नंबर का दुरुपयोग

जीएसटी नंबर का गैरकानूनी दुरुपयोग कुछ असामाजिक तत्व अन्य व्यापारियों के जीएसटी नंबर का उपयोग कर फर्जी बिलिंग कर रहे हैं, जिससे निर्दोष व्यवसायियों को विभागीय कार्यवाही का सामना करना पड़ता है।

जीएसटी दर पूर्ववत पांच प्रतिशत हो

12% जीएसटी दर से जूता उद्योग पर संकट पूर्व में 5% दर पर चल रहे जूता उद्योग पर अब 12% कर लागू कर दिया गया है। जबकि उत्तरप्रदेश सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में आगरा का जूता शामिल है, फिर भी यह दर व्यापार को नुकसान पहुंचा रही है।

लगातार सर्वे से भय का माहौल

लगातार सर्वे से भय का माहौल जीएसटी विभाग द्वारा बार-बार किए जा रहे सर्वेक्षणों से व्यापारी समुदाय आतंकित है। फेडरेशन ने मांग की कि सर्वे में उसके प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए ताकि पारदर्शिता और विश्वास बना रहे।

प्रतिवेदन में मांग की गई है कि विभागीय अधिकारियों और फेडरेशन के बीच नियमित बैठकें आयोजित करने की जाएं ताकि नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

फेडरेशन अध्यक्ष विजय सामा ने स्पष्ट कहा कि सरकार और व्यापारियों के बीच विश्वास तभी बन सकता है जब नीति निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवहारिक हो। हम सुधार चाहते हैं, टकराव नहीं।

SP_Singh AURGURU Editor