आयकर से कहीं ज्यादा जीएसटी को रिव्यू किए जाने की जरूरत

आजकल जिसे देखो वही इनकम टैक्स के नए कोड बिल की चर्चा कर रहा है जबकि मुझे लगता है आज के समय में आयकर से ज्यादा जीएसटी पर चर्चा करने की जरूरत है।

Feb 14, 2025 - 12:14
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आयकर से कहीं ज्यादा जीएसटी को रिव्यू किए जाने की जरूरत

-यह कहां की तुक कि व्यापारी सौ रुपये कमाए जबकि सरकार डेढ़ सौ रुपये

आयकर तो दो-तीन करोड़ लोगों को ही प्रभावित करता है जबकि जीएसटी पूरे 140 करोड़ की जनसंख्या को प्रभावित कर रहा है। यह खर्चों पर लगाया जाने वाला कर है। आप जो भी व्यय करते हैं, उस पर पांच परसेंट से लेकर 28 परसेंट तक जीएसटी लगाया जाता है।

हम सभी को पता है कि पिछले दशकों में आयकर तथा सेल टैक्स ही मुख्य रूप से टैक्स के स्रोत थे जबकि सर्विस टैक्स के रूप में एक नया कर बाद में जोड़ दिया गया था। तब यह उम्मीद की गई थी कि सर्विस टैक्स लगाने से आयकर देने वाले दो या तीन करोड़ लोगों को कुछ राहत प्रदान की जा सकेगीI

बाद में आयकर के अलावा लगाए जाने वाले बाकी करों को जीएसटी में समावेशित कर दिया गयाI  जीएसटी के माध्यम से शुरू में सरकार को लगभग 50000 करोड़ रुपये प्रति माह की आय होती थी जो कि बढ़ते-बढ़ते आज लगभग 2 लाख करोड़ रुपये प्रतिमाह तक पहुंच गई हैl कर की दर भी 28 परसेंट तक हो गई है। स्थिति यह है कि एक व्यापारी जो व्यापार करके 5 से 10 परसेंट तक ही आय कर पाता है जबकि सरकार उस व्यापारी की आय से दो-तीन गुना ज्यादा आय टैक्स माध्यम से अर्जित कर रही हैl

क्या किसी व्यापारी द्वारा मेहनत कर की जाने वाली आय से दो-तीन गुना ज्यादा सरकारी कमाई उचित है? इस पर बहस किये जाने की जरूरत हैl जिस प्रकार आयकर कानून को रिव्यू किया गया है, उसी तरह जीएसटी कानून को भी रिव्यू किए जाने की सख्त जरूरत हैl

यह बिल्कुल उचित नहीं प्रतीत होता कि व्यापारी तो कमाए 100  रुपये और उसी व्यापारी के जरिए सरकार कमाए डेढ़ सौ रुपयेl उम्मीद ही कर सकते हैं कि नीति निर्धारक इस विषय पर भी कुछ मापदंड तय करेंगेI

SP_Singh AURGURU Editor