दीवाली सीजन के बाजार पर जीएसटी रिफॉर्म का काला सायाः व्यापारी और उपभोक्ता कन्फ्यूज रहेंगे

प्रधानमंत्री मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर की गई जीएसटी रिफॉर्म घोषणा ने दीवाली के बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है। 12% और 28% जीएसटी स्लैब घटाकर 5% और 18% करने की योजना से व्यापारी स्टॉकिंग को लेकर दुविधा में हैं—पहले खरीदे सामान पर घाटे का डर है और नए स्टॉक का समय त्योहारी सीजन निकल जाने तक टल सकता है। उपभोक्ता भी सोच रहे हैं कि घटे टैक्स के बाद ही खरीद करें, जिससे दीवाली पर बिक्री प्रभावित हो सकती है। कुल मिलाकर, समय से पहले स्पष्ट गाइडलाइन न मिलने पर इस बार का त्योहारी सीजन बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।

Aug 22, 2025 - 13:07
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दीवाली सीजन के बाजार पर जीएसटी रिफॉर्म का काला सायाः व्यापारी और उपभोक्ता कन्फ्यूज रहेंगे

-गिरधारी लाल गोयल-

स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई जीएसटी रिफॉर्म की घोषणा दीवाली के मौके पर व्यापारिक बाजारों के लिए संभावित नकारात्मक प्रभाव पैदा कर सकती है। सामान्यतया टैक्स स्लैब में बदलाव बिना पूर्व सूचना के होता है, जिससे बाजार भाव सुबह खुलते ही प्रभावित हो जाते हैं। इस बार दीवाली के सीजन को ध्यान में रखकर टैक्स स्लैब बदलने का निर्णय व्यापारियों ही नहीं उपभोक्ताओं के लिए भी अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न कर रहा है।

जैसी कि जानकारियां सामने आ रही हैं, उसके अनुसार 12% और 28% जीएसटी स्लैब को 5% और 18% तक लाने की योजना है। दीवाली पर 12% जीएसटी वाली जो वस्तुएं खरीदी जाती हैं, उनमें आम तौर पर  रसोई के अचार-मुरब्बा-घी, 500 रुपये से अधिक के जूते और कपड़े, अगरबत्ती-मोमबत्ती, पैक्ड मिठाई, नमकीन, ड्राई फ्रूट्स (काजू को छोड़कर), चॉकलेट आदि होती हैं। जीएसटी रिफॊर्म के के कारण इन बस्तुओं की खरीद-बिक्री प्रभावित हो सकती है।

इसके साथ ही 28% जीएसटी वाली वस्तुएं, जैसे एयर कंडीशनर, टेलीविजन, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन, कार और दोपहिया वाहन, सौंदर्य प्रसाधन, मेकअप किट, परफ्यूम, पेंट्स-वार्निश, प्रीमियम सजावटी लाइट्स और आतिशबाजी आदि की भी त्योहारी सीजन में खरीदारी होती है, जो प्रस्तावित जीएसटी रिफॊर्म से प्रभावित होगी।

जीएसटी का यह परिवर्तन दो स्तर पर कंफ्यूजन उत्पन्न करेगा। यह भ्रम इस प्रकार होगा-

दुकानदार स्तर परः रेगुलर रजिस्टर्ड दुकानदारों के लिए आईटीसी के कारण टैक्स घटने पर भी किसी खास असर की संभावना नहीं है। लेकिन कम्पोजिशन स्कीम वाले दुकानदार अपने स्टॉक को लेकर असमंजस में रहेंगे। उन्हें डर रहेगा कि अभी स्टॊक कर लिया और बाद में टैक्स घटने के बाद कीमतें कम होने पर उन्हें नुकसान उठाना पड़ेगा।

यहां यह बताना जरूरी है कि त्योहारी सीजन के लिए व्यापारियों द्वारा सामान स्टॊक करने का काम हर साल जुलाई से शुरू कर अगस्त तक पूरा कर लिया जाता था। अब 15 अगस्त को पीएम मोदी के जीएसटी रिफॊर्म की घोषणा के बाद से कारोबारियों की दुविधा यह है कि वे स्टॊक कैसे करें। जीएसटी रिफॊर्म आने से पहले अगर वे स्टॊक कर लेते हैं तो उन्हें वर्तमान जीएसटी की दरों से ही लेना पड़ेगा और जब त्योहारी सीजन में इसे बेचना शुरू करेंगे तब तक जीएसटी की दरें घट चुकी होंगी। ऐसे में ग्राहक तो पुरानी दरों पर जीएसटी देने से रहा। ऐसे में कारोबारी को मुनाफे की बजाय घाटे की मार झेलनी पड़ सकती है।

पीएम मोदी की 15 अगस्त को की गई घोषणा के समय तक बहुत से कारोबारी त्योहारी सीजन के लिए स्टॊक जुटा चुके थे। वे पहले से ही तनाव में आ चुके हैं। जिन्होंने अभी तक स्टॊक नहीं किया, वे पीएम की घोषणा के बाद रुक गये हैं। वे जीएसटी रिफॊर्म का इंतजार कर रहे हैं। इन व्यापारियों के सामने दुविधा यह है कि वे स्टॊक कर पाएंगे भी या नहीं क्योंकि जीएसटी रिफॊर्म की प्रक्रिया अभी शुरू ही हुई है। जीओएम की बैठक हो चुकी है। अभी इस पर अंतिम मुहर जीएसटी काउंसिल की बैठक में लगनी है। काउंसिल की बैठक पहले 20-21 सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में किया जा सकता है।

मतलब यह हुआ कि जीएसटी के रिफॊर्म जब तक आ पाएंगे तब तक सितंबर का अंतिम सप्ताह तो आ ही चुका होगा। अब त्योहारी सीजन पर गौर करें तो यह नवरात्र यानि श्राद्ध पक्ष के तत्काल बाद शुरू हो जाता है। सितंबर के अंतिम सप्ताह का मतलब है कि वह नवरात्र का समय होगा जो कि त्योहारी सीजन में आता है। कारोबारियों की यही दुविधा है। वे इस बात को लेकर परेशान हैं कि जब तक जीएसटी की घटी दरें लागू होंगी तब तक त्योहारी सीजन शुरू हो चुका होगा। जब तक वे घटी दरों पर स्टॊक जुटाएंगे, तब तक कम से कम नवरात्र का टाइम तो गुजर ही चुका होगा।

उपभोक्ता स्तर पर: उपभोक्ता सोचेंगे कि जो वस्तुएं दीवाली के बाद कम जीएसटी पर उपलब्ध होंगी, उनकी खरीद अभी क्यों की जाए। इससे दीवाली के खरीदारी सीजन में सामान्य बिक्री में गिरावट आ सकती है।

दीवाली खरीदारी सीजन नवरात्र के बाद ही शुरू हो जाता है। इस अवधि में सामान्य उपभोक्ताओं द्वारा विभिन्न वस्तुओं की सर्वाधिक खरीदारी की जाती है। व्हीकल, इलेक्ट्रोनिक आयटम की बिक्री पर तो बहुत ज्यादा फर्क पड़ने वाला है जबकि इनकी बिक्री इसी सीजन पर सर्वाधिक होती है। जब इसमें सीधा 10% का अंतर पड़ने वाला हो तो ग्राहक क्यों खरीदने लगा।

कुल मिलाकर जीएसटी स्लैब परिवर्तन की घोषणा ने दीवाली के सीजन के बाजार को अस्थिर और अनिश्चित बना दिया है। इससे व्यापारियों की स्टॉकिंग रणनीति प्रभावित होगी और उपभोक्ता खरीद में विलंब कर सकते हैं। इस प्रकार, इस बदलाव के चलते इस साल का दीवाली का त्योहारी सीजन बुरी तर पिट भी सकता है।

अनिश्चतता की ऐसी स्थिति में अच्छा तो यही रहेगा कि सरकार स्पष्ट गाइडलाइन और समयबद्ध जानकारी साझा करे ताकि बाजार में संभावित अनिश्चितता दूर हो सके।

SP_Singh AURGURU Editor