राजा बलवंत सिंह इंटर कॉलेज में गुरु वंदन समारोहः दो दर्जन शिक्षकों का सम्मान
आगरा। राजा बलवंत सिंह इंटर कॉलेज, आगरा में आयोजित गुरु वंदन समारोह के दौरान शिक्षा जगत को नई दिशा देने वाले दो दर्जन से अधिक शिक्षकों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना भी की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार ने कहा कि श्रेष्ठ और शुभ को बचाना ही आज की सबसे बड़ी क्रांति है, क्योंकि अज्ञानता के अंधकार में शुभ और श्रेष्ठ मूल्य लुप्त होते जा रहे हैं।
डॉ. नरवार ने कहा कि नैतिक मूल्यों के पतन और शिक्षा में गिरावट के लिए शिक्षक वर्ग को आत्ममंथन करना होगा। उन्होंने चेताया कि जब गुरु अंधा और शिष्य बहरा हो जाए, तो समाज दिशा हीन हो जाता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति- ‘गुरु सिख बधिर अंध का लेखा, एक न सुनै एक नहिं देखा’- का उल्लेख करते हुए कहा कि आज गुरु और शिष्य दोनों अपने दायित्वों से विमुख हो गए हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की पंक्तियों- ‘बैचेन हैं हवाएं, सब ओर बेक़ली है...’ का उल्लेख कर वर्तमान सामाजिक और शैक्षिक परिदृश्य की भयावहता को रेखांकित किया।
विशिष्ट अतिथि और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. भानु प्रताप सिंह ने कहा कि आज गुरु-शिष्य परंपरा का मूलभाव लुप्त हो गया है। पहले गुरु शिष्य के चरित्र और आध्यात्मिक विकास में सहायक होता था, अब वह संबंध मात्र औपचारिकता रह गया है।
मुख्य वक्ता प्रो. युवराज सिंह, अध्यक्ष, हिंदी विभाग, आरबीएस कॉलेज ने कहा कि आज शिक्षक प्रशासनिक, शैक्षणिक और सामाजिक दायित्व तो निभा रहा है, परंतु चरित्र निर्माण की भूमिका कमजोर पड़ रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्रधानाचार्य मेजर विवेक वीर सिंह ने की। आरंभ में डॉ. देवी सिंह नरवार ने दीप प्रज्वलन कर, मां सरस्वती और संस्थापक राजा बलवंत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
समारोह में डॉ. कृष्ण पाल सिंह, डॉ. राघवेंद्र सिंह, डॉ. अखिलेश प्रताप सिंह, डॉ. दुष्यंत कुमार सिंह सहित अनेक शिक्षाविदों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अंजुल चौहान ने किया।