19 साल की उम्र में फांसी-फिर भी अमर, शहीद हेमू कालानी को आगरा में नमन
आगरा में शहीद हेमू कालानी के 83वें बलिदान दिवस पर सिंधी युवा मंच एवं सिंधी जनरल पंचायत द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। वक्ताओं ने 19 वर्ष की उम्र में फांसी पाने वाले इस युवा क्रांतिकारी के साहस, बलिदान और राष्ट्रप्रेम को याद किया। बड़ी संख्या में समाजसेवियों की उपस्थिति में शहीद की प्रतिमा पर नमन किया गया और युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।
युवाओं के लिए आज भी प्रेरणा हैं अमर क्रांतिकारी हेमू कालानी
आगरा। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर शहीदों में शुमार युवा क्रांतिकारी शहीद हेमू कालानी के 83वें बलिदान दिवस पर आगरा में श्रद्धा, सम्मान और देशभक्ति से ओत-प्रोत कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सिंधी युवा मंच एवं पूज्य सिंधी जनरल पंचायत शाहगंज के संयुक्त तत्वावधान में यह कार्यक्रम तहसील चौराहा स्थित शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा स्थल पर संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवियों, युवाओं और गणमान्य नागरिकों ने उपस्थित होकर अमर शहीद को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया।
देश के लिए हंसते-हंसते दी फांसी
इस अवसर पर वक्ताओं ने शहीद हेमू कालानी के जीवन और संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल 19 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजी हुकूमत को ललकारने वाला यह युवा आज भी हर देशभक्त के लिए प्रेरणा है। मुख्य वक्ता योगी विश्वनाथ ने कहा कि शहीद हेमू कालानी ने कम उम्र में ही देश के लिए प्राण न्योछावर कर दिए। उनके त्याग से आज के युवाओं को राष्ट्रभक्ति की सीख लेनी चाहिए।
युवाओं के आदर्श, क्रांति की मिसाल
सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश सोनी ने कहा कि हेमू कालानी केवल सिंधी समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए साहस और बलिदान की मिसाल हैं। कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता चिमन पैरवाणी एवं नरेश लखवानी ने की, जबकि संचालन हरीश टहल्यानी ने किया।
1999 में स्थापित हुई थी प्रतिमा
संस्था के संरक्षक हेमंत भोजवानी ने जानकारी दी कि शहीद हेमू कालानी की प्रतिमा वर्ष 1999 में संस्था के सहयोग से स्थापित की गई थी। प्रतिमा से पूर्व इस मार्ग का नाम भी शहीद हेमू कालानी मार्ग रखा गया। संस्था पिछले 35 वर्षों से हर वर्ष 21 जनवरी (बलिदान दिवस), 23 मार्च (जन्मदिवस) श्रद्धापूर्वक मनाती आ रही है।
ऐसे थे अमर शहीद हेमू कालानी
23 मार्च 1923 को सख्खर (वर्तमान पाकिस्तान, सिंध प्रांत) में जन्मे हेमू कालानी छात्र जीवन से ही स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय हो गए थे। उन्होंने स्वराज सेना का गठन कर अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलाया। हथियारों से लदी अंग्रेजी रेलगाड़ी को पटरी से उतारने की योजना में उन्हें गिरफ्तार कर 21 जनवरी 1943 को महज 19 वर्ष की उम्र में फांसी की सजा दे दी गई थी। उनका जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की जीवंत मिसाल है।
इनकी रही उपस्थिति
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजसेवी, जनप्रतिनिधि और नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से मोहनलाल बोधवानी, श्याम भोजवानी, भोजराज लालवानी, कन्हैया सोनी, सुनील कर्मचंदानी, पार्षद राधा रानी, गोपाल चाहर, विजय भाटिया, नरेश हांडा, महेंद्र कुमार, सुरेश राजपाल, हर्ष ढालिया, उमेश पेरवानी, मनोज नोतनानी, दीपक आहूजा, लक्ष्मण कल्याणी, सनी ग्यामलानी सहित अनेक गणमान्य शामिल रहे। कार्यक्रम के अंत में शहीद की स्मृति में फल वितरण किया गया।