हरियाणाः हुड्डा का ओवर कान्फिडेंस और शैलजा का अपमान कांग्रेस को ले डूबा

हरियाणा में कांग्रेस जीती हुई बाजी हार गई। क्यों और कैसे हो गया ऐसा? यह सवाल कांग्रेस नेतृत्व के साथ ही राजनीतिक विश्लेषकों को भी मंथन करने पर मजबूर कर रहा है। क्या पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा का ओवर कान्फिडेस और दलित नेता कुमारी शैलजा का अपमान कांग्रेस के डूबने की वजह बन गया?

Oct 9, 2024 - 14:13
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हरियाणाः हुड्डा का ओवर कान्फिडेंस और शैलजा का अपमान कांग्रेस को ले डूबा

एसपी सिंह
चंडीगढ़। सत्ता हाथ से फिसलने के बाद कांग्रेस अब हाथ मल रही है। हरियाणा में कांग्रेस के साथ वैसा ही कुछ हो गया, जैसा लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ हुआ था। अति आत्मविश्वास की वजह से लोकसभा चुनाव में भाजपा ने झटका खाया था और यही खेल हरियाणा में कांग्रेस के साथ हो गया। 

हरियाणा में कांग्रेस जीती हुई बाजी कैसे हार गई? यह सवाल कांग्रेस को तो परेशान कर ही रहा है, राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी पहेली बन गया है। प्रथमदृष्टया तो यही लगता है कि कांग्रेस का ओवर कान्फिडेंस और अंदरूनी झगड़े कांग्रेस को ले डूबे। पूरे चुनाव के दौरान पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा हर तरफ हावी दिखे। कांग्रेस नेतृत्व भी उनके सामने बौना नजर आया। 
दलित नेता शैलजा कुमारी का भरे चुनाव में अपमान भी शायद कांग्रेस की हार की प्रमुख वजहों में से एक है। 

कांग्रेस को हरियाणा की सत्ता के लिए अब पांच साल और इंतजार करना पड़ेगा। कांग्रेस ने हरियाणा में अपनी सरकार तय मान ली थी। हरियाणा कांग्रेस के नेता भी सत्ता पक्ष जैसा व्यवहार करने लगे थे। चुनाव शुरू होने से पहले ही मंत्री पद के वायदे तक कर दिए गए थे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से लेकर निचले कार्यकर्ता तक सबका यही हाल था। 

ओपिनियन पोल से लेकर सारे एग्जिट पोल भी कांग्रेस की वापसी का इशारा कर रहे थे। 
कांग्रेस नेताओं के अति आत्मविश्वास का आलम यह था कि अपनी सरकार तय मानकर कांग्रेसी उड़ने लगे थे। हरियाणा कांग्रेस के नेता पहले चुनाव जीतने पर ध्यान देने के बजाय चुनाव बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी तक कैसे पहुंचे, इसका गुणाभाग चुनाव से पहले ही लगाने लगे थे। 

राज्य में कांग्रेस कई धड़ों में बंटी हुई है। पावरफुल गुट है पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं दलित नेता शैलजा कुमारी का। टिकटों के बंटवारे के दौरान भी इन दोनों नेताओं में खींचतान चली। बाजी भूपेंद्र हुड्डा मार ले गए। 60 से ज्यादा प्रत्याशी भूपेंद्र हुड्डा की पसंद के थे। शैलजा समर्थकों को मात्र 13 सीटों पर टिकट मिल सके। भूपेंद्र हुड्डा ने टिकटों के बंटवारे में पार्टी हाईकमान तक की नहीं चलने दी। 

यहीं से शैलजा की नाराजगी की बातें सामने आने लगी थीं। बात उस समय और बढ़ गई जब हुड्डा के एक समर्थक ने सावर्जनिक स्थल पर शैलजा कुमारी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। किसी ने इसका वीडियो बना लिया और वायरल कर दिया। 

इसके बाद शैलजा इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने खुद को चुनाव प्रचार से अलग कर लिया। आठ दिन तक वे घर बैठी रहीं। बाद में कांग्रेस नेताओं ने उन्हें मनुहार कर फिर से चुनाव में जुटाया। तब भी वे अपने समर्थकों के क्षेत्र में प्रचार तक सीमित रहीं। 

आपको बता दें कि चुनाव से पहले पूरे हरियाणा में शैलजा कुमारी के फोटो के साथ इस तरह के होर्डिंग लगाए गए थे कि इस बार हरियाणा का दलित मुख्यमंत्री हो। दलितों को उम्मीद थी कि हरियाणा में सरकार बनेगी तो कांग्रेस शैलजा को ही सीएम बनाएगी। सीएम बनाना तो दूर, भरे चुनाव में शैलजा का अपमान होता रहा। शायद इसका गलत संदेश दलितों में गया और उसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ गया। 

कांग्रेस की जीत का समीकरण जाट, दलित और मुस्लिम वोट बैंक था। हुड्डा ने अपने समर्थक दलित नेता उदयभान को कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनवा रखा था, इसलिए उन्हें पूरी उम्मीद थी कि शैलजा फैक्टर को वे बेअसर कर देंगे। चुनाव में हुड्डा समर्थक प्रदेश अध्यक्ष उदयभान खुद अपना ही चुनाव हार गए। जब उदयभान खुद चुनाव नहीं जीत पाए तो वे हरियाणा के दलितों को शैलजा के मुकाबले कितना प्रभावित कर पाए होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 

हरियाणा के दलित वोट बैंक पर इनेला-बसपा, जेजेपी-एएसपी गठबंधन की भी नजर थी। माना जा रहा है कि हाथ में आती हुई सत्ता कांग्रेस से इसलिए फिसल गई क्योंकि शैलजा के अपमान के बाद दलित वोटर कांग्रेस से दूर हो गए। शैलजा के अपमान के मुद्दे को भाजपा और बसपा समेत दूसरे दलों ने भी हवा दी थी। 

चुनाव नतीजों के बाद हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की हसरतों पर भी तुषारापात हो गया है। हुड्डा इस बार अपने सांसद बेटे दीपेंद्र हुड्डा की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ताजपोशी की तैयारी में थे। इसके लिए अब उनका इंतजार पांच साल के लिए और बढ़ गया है। 

SP_Singh AURGURU Editor