राणा सांगा विवाद में दायर याचिका की पोषणीयता पर सुनवाई 10 अप्रैल को
आगरा। राणा सांगा को लेकर चल रहे एक विवाद में आर्य संस्कृति संरक्षण ट्रस्ट द्वारा दायर किए गए सिविल केस की सुनवाई 10 अप्रैल को होगी।
वादी अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने इस संबंध में बताया कि यह सिविल वाद 24 मार्च को न्यायालय में दायर किया गया था। इस वाद पर पिछली सुनवाई के दौरान न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि वादीगण ने न्यायालय से यह घोषणा करने का अनुरोध किया है कि बाबर को इब्राहिम लोदी के विरुद्ध भारत पर आक्रमण करने के लिए दौलत खान लोदी ने आमंत्रित किया था, न कि राणा सांगा ने।
न्यायालय ने कहा कि इसके वादीगण यह भी चाहते हैं कि न्यायालय यह घोषित करे कि 17 मार्च 1527 ईस्वी को सीकरी किले पर अंतिम निर्णायक युद्ध हुआ था, न कि खानवा में।
अपनी इन मांगों के समर्थन में वादीगणों ने विभिन्न ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख किया है और वर्ष 1883-84 का लाहौर गजेटियर भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
न्यायालय ने वादीगणों के इस वाद को एक विशिष्ट घोषणा हेतु माना है। इसका अर्थ है कि न्यायालय इस मामले में किसी विशिष्ट तथ्य या स्थिति को आधिकारिक रूप से घोषित करने पर विचार कर रहा है। ऐसी घोषणा करने से पहले न्यायालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वादीगणों को इस प्रकार की घोषणा की मांग करने का कानूनी अधिकार है या नहीं।
इसी कारण न्यायालय आगामी 10 अप्रैल को वादीगणों के अधिकार की पोषणीयता के बिंदु पर सुनवाई करेगा। इस सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि वादीगणों के पास इस तरह की घोषणा की मांग करने का कानूनी आधार है या नहीं। यदि न्यायालय यह पाता है कि वादीगणों को ऐसा अधिकार है, तो यह मामला आगे बढ़ेगा और न्यायालय में प्रस्तुत किए गए ऐतिहासिक तथ्यों पर विचार करेगा। अन्यथा वाद खारिज भी किया जा सकता है।
10 अप्रैल को होने वाली सुनवाई इस मामले में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे यह स्पष्ट हो पाएगा कि यह कानूनी लड़ाई आगे किस दिशा में जाएगी।