आचार्य विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर भजनों से अर्पित की गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि
आगरा। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज केवल जैन संत ही नहीं, बल्कि अपने समय की जीवित नैतिक चेतना थे। उनका संपूर्ण जीवन संयम, अहिंसा, तप, त्याग और आत्मशुद्धि का अनुपम उदाहरण रहा। उन्होंने शब्दों से नहीं, बल्कि अपने आचरण से समाज को सादगी, सत्य और संस्कारों का मार्ग दिखाया। उनके विचार और तपस्वी जीवन भारतीय संस्कृति, भाषा और मूल्यों के संरक्षण की सशक्त धरोहर बनकर सदैव स्मरणीय रहेंगे।
इन्हीं भावनाओं के साथ शांतिनाथ महिला मंडल, जयपुर हाउस, आगरा द्वारा आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धा और भक्ति के साथ कार्यक्रम का आयोजन किया। यह आयोजन नीतू जैन के निवास पर संपन्न हुआ, जहां भजनों के माध्यम से आचार्य श्री को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण से पूरा परिसर सराबोर हो उठा।
भजन कार्यक्रम में राखी, अन्नू, रुचि, रितु, सीमा, निधि, सोनल, रेनू, करुणा, प्रिया, शिल्पी, सिखा, आकांक्षा, एकता, रूबी, कल्पना, शालू, नेहा, महक सहित अनेक महिला श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। सभी ने भजनों के माध्यम से आचार्य श्री के तप, त्याग और आदर्शों को स्मरण करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी का जीवन आज के भौतिकवादी युग में संयम और आत्मशुद्धि का सशक्त संदेश देता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही समाज में नैतिकता, शांति और संस्कारों की पुनर्स्थापना संभव है।
वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन मानवता के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है। सरल जीवन और उच्च विचारों के माध्यम से उन्होंने आत्मकल्याण के साथ-साथ समाज कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। उनका संदेश और सान्निध्य आने वाली पीढ़ियों को भी धर्म, नैतिकता और आत्मसंयम की दिशा में मार्गदर्शन करता रहेगा।