हेल्प आगराः 16 वर्ष में नाम ही नहीं, काम भी बोला
आगरा। तीन नवंबर 2008 को हेल्प आगरा के रूप में रोपा गया एक पौधा 16 वर्ष पूरे कर चुका है। तरुणावस्था में यह पौधा तेजी से बढ़ रहा है। 15 लोगों द्वारा रोपे गये इस पौधे को सींचने का काम अब 750 से अधिक ऐसे सेवाभावी दानवीर कर रहे हैं, जिनमें सेवा को लेकर यही भाव रहता है, 'नेकी कर दरिया में डाल।'
संस्था ने आज अपना स्थापना दिवस भी मनाया। हेल्प आगरा ने 16 साल के सफर में अपनी जो इमेज बनाई है, उससे एक बात साफ है कि अगर आप सच्चे मन और ईमानदारी से कोई काम करें तो आपके पीछे खड़े होने के लिए तमाम लोग तैयार हैं। हेल्प आगरा के चेहरों के रूप में तो चंद लोग ही हैं, लेकिन ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो सेवा कार्य करना चाहते हैं, लेकिन तमाम व्यस्तताओं की वजह से उनके पास इस काम के लिए वक्त नहीं होता।
ऐसे लोगों को नजर आती है हेल्प आगरा, जहां वे आंख बंद कर लाखों से करोड़ों रुपये तक का दान यह सोचकर दे देते हैं कि उनके पैसे का सदुपयोग जरूरतमंदों के लिए ही होगा। 16 वर्ष के सफर में यही है हेल्प आगरा की सबसे बड़ी उपलब्धि। आज स्थिति यह है कि संस्था कोई बड़ा काम हाथ में ले तो धन की कमी आड़े नहीं आती। शहर के तमाम सेवाभावी संस्था को सहयोग करने के लिए आगे आ जाते हैं।
ऐसे हुआ हेल्प आगरा का जन्म
हेल्प आगरा के जन्म की कहानी भी बहुत रोचक है। बात 2008 में हेल्प आगरा के जन्म से पहले की है। किसी एक कार्यक्रम में एसएन मेडिकल कालेज के तत्कालीन प्राचार्य डाक्टर एनसी प्रजापति की मुलाकात क्षेत्र बजाजा के तत्कालीन महामंत्री अशोक गोयल और मुकेश जैन से हुई। डाक्टर प्रजापति ने अपनी एक परेशानी का जिक्र कर कहा कि वे मेडिकल कालेज में एम्बुलेंस सेवा 102 का सही से संचालन नहीं करा पा रहे हैं।
तब अशोक गोयल ने प्राचार्य से कहा कि इस सेवा को हम क्षेत्र बजाजा कमेटी से संचालित कराए देते हैं। प्रिंसिपल ने सहमति दे दी। बाद में अशोक गोयल ने यह प्रस्ताव क्षेत्र बजाजा कमेटी में रखा, लेकिन कमेटी इसके लिए तैयार नहीं हुई। अब सवाल कमिटमेंट का था। अशोक गोयल और मुकेश जैन ने इसके बाद नया संगठन बनाने की सोची और फिर जन्म हुआ हेल्प आगरा का।
बाद में इसी हेल्प आगरा ने एसएन मेडिकल कालेज की 102 एम्बुलेंस सेवा का संचालन संभाला। 3 नवंबर 2008 को जन्मी हेल्प आगरा के संस्थापकों में अशोक गोयल और मुकेश जैन के अलावा आजाद मोहन अग्रवाल, श्रीमती प्रवीन पटनी, अशोक बंसल, गौतम सेठ, अखिलेश अग्रवाल, अनिल बंसल, ओम प्रकाश अग्रवाल, रश्मि मगन, हरिशंकर गोयल, गोपाल बंसल ह्युडई, नवनीत बंसल, रक्षित टंडन और गिरीश बंसल शामिल थे।
जब पहली एम्बुलेंस जुड़ी
हेल्प आगरा प्रारंभ में 102 एम्बुलेंस सेवा को संचालित करने तक सीमित थी। बाद में संस्था के प्रयासों से यह सेवा अच्छी चलने लगी तो एम्बुलेंस की डिमांड भी बढ़ने लगी। एम्बुलेंस की कमी होने लगी। तब संस्था को सबसे पहली एम्बुलेंस अशोक गोयल ने दी। इसके बाद तो सिलसिला सा चल न निकला। संस्था के दूसरे सदस्यों ने एक-एक कर कई एम्बुलेंस संस्था को दीं।
इस प्रकार संस्था का यह प्रकल्प आकार लेने लगा। एक समय ऐसा भी था जब संस्था 35 से 40 तक एम्बुलेंस संचालित कर रही थी। वर्तमान में 13 एम्बुलेंस चल रही हैं। एम्बुलेंस सेवा से हेल्प आगरा की अपनी अलग पहचान बनी। इस संस्था ने एम्बुलेंस के जरिए मरीजों और मृतकों के शवों को यूपी, एमपी, राजस्थान, हरियाणा और दूसरे राज्यों के साथ ही नेपाल तक पहुंचाया है।
संस्थापक सदस्यों में से एक अशोक गोयल 2010 में आगरा से सूरत शिफ्ट हो गए थे। उनके बाद महामंत्री पद का दायित्व किशन कुमार अग्रवाल ने संभाला और 2023 तक इस पद पर रहे। अध्यक्ष के रूप में ओम प्रकाश अग्रवाल और रामशरण मित्तल के साथ किशन कुमार अग्रवाल के कार्यकाल में संस्था ने ऊंचाइयां छुईं। वर्तमान में सुरेंद्र जैन अध्यक्ष और गौतम सेठ महामंत्री पद संभाल रहे हैं।
गरीबों को दवा था तीसरा प्रकल्प
चूंकि एसएन मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल ने हेल्प आगरा को इमरजेंसी परिसर में ही सेवा कार्य के लिए जगह दे दी थी, इसलिए हेल्प आगरा के वालंटियर वहां हर वक्त मौजूद रहते थे। पदाधिकारियों का भी आना जाना रहता था। पदाधिकारियों की इस दौरान नजर उन गरीब मरीजों के तीमारदारों पर पड़ी जिनके पास बाजार से दवा खरीदने तक को पैसे नहीं होते थे।
संस्था ने इस सेवा कार्य को भी हाथ में ले लिया। वास्तविक जरूरतमंदों की पहचान कर उन्हें वे दवाएं उपलब्ध कराई जाने लगीं जिन्हें वे खरीद नहीं पाते थे। कई बार एसएन मेडिकल कालेज में टेक्नीशियन तक संस्था ने उपलब्ध कराए।
दवा प्रकल्प से पैदा हुई फार्मेसी सेवा
गरीब मरीजों की दवाएं देने का प्रकल्प आगे बढ़ा तो फिर संस्था के कर्ताधर्ताओं को विचार आया कि मरीजों को सस्ती दवाएं कैसे उपलब्ध कराई जाएं। तभी विचार बना कि अपनी एक फार्मेसी खोली जाए। मोती कटरा में हनुमान तिराहे के पास एक तीन मंजिला भवन खरीदा गया। इसके लिए 45 लाख की जरूरत थी। इस काम में शहरवासियों से सहयोग मांगा गया।
दो महीने के अंदर धन का लक्ष्य पूरा हो गया। भवन की रजिस्ट्री हुई और इसमें पहली फार्मेसी 11 मार्च 2011 को खुल गई। इस फार्मेसी पर एक तो दवा सस्ती थी और दूसरे असली। शहर के दूसरे हिस्सों से भी यहां लोग पहुंचने लगे तो संस्था ने दूसरी फार्मेसी 18 नवंबर 2014 को प्रताप नगर में खोल दी। यह कागजी भवन में संचालित है, जो वीरेंद्र प्रकाश कागजी के परिजनों ने संस्था को सेवा के लिए दिया हुआ है।
एक कदम और आगे बढ़े तो हास्पिटल खुल गया
एसएन की इमरजेंसी में अव्यवस्थाएं देख हेल्प आगरा के पदाधिकारियों ने संस्था का एक अस्पताल बनाने का विचार किया। डा. अशोक गर्ग ने इसकी पहल 50 लाख रुपये देकर की। मोतीकटरा में फार्मेसी के पास ही एक और भवन दानदाताओं के सहयोग से
खरीदा गया और इसमें स्थापित हुआ डा. पवन गर्ग हास्पिटल।
हेल्प आगरा का यह अस्पताल गरीबों के लिए बहुत मददगार साबित हो रहा है। बहुत सस्ती दरों पर अस्पताल में सभी रोगों के 15 से ज्यादा डाक्टरों की ओपीडी लगती है। नाममात्र के शुल्क पर डायलिसिस, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, पैथोलाजी की सुविधा भी यहां है। ओपीडी चार्ज 50 से सौ रुपये तक है।
इस अस्पताल को संस्था के ट्रस्टी सुमेर चंद जैन की स्मृति में उनके परिजनों ने डायलिसिस का पूरा सेटअप दिया है। अल्ट्रासाउंड के लिए स्व. वीपी गोयल की ओर से 25 लाख रुपये मिले। वीपी गोयल दोनों फार्मेसी का संचालन भी देखते थे। अस्पताल में समय समय पर चिकित्सा शिविर भी लगते हैं, जिसमें डाक्टर मुफ्त में चेकअप और दवाएं देते हैं। ब्लड डोनेशन कैंप भी संस्था लगाती रहती है।
ये प्रकल्प भी हैं संस्था के
हेल्प आगरा कई और प्रकल्प भी चला रही है। गरीब मरीज दवा सेवा के अंतर्गत संस्था जरूरतमंदों को फार्मेसी से दवा दिलवाती है।
- अन्नपूर्णा सेवा के अंतर्गत शहर में ऐसे लोग, जिन्हें खाने के भी लाले हैं, उन्हें हर माह राशन के पैसे भिजवाती है। 40 परिवारों को यह सुविधा दी जा रही है।
- मोती कटरा स्थित हेल्प आगरा के आफिस पर गरीब लड़कियों को सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण देकर संस्था उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करने में सहयोग दे रही है। यह प्रोजेक्ट अंजू किशोर देख रही हैं। अब तक सैकड़ों लड़कियां अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं। यही नहीं, इनके बनाए थैले भी हेल्प आगरा खरीद रही है।
- संस्था की ओर से नेत्रदान और देहदान के लिए भी जागरूकता का अभियान चलाया जाता है। अब तक 17 देहदान और 29 नेत्रदान कराए जा चुके हैं।
- हेल्प आगरा की ओर से गरीब लोगों को उनके घरों पर चिकित्सा उपकरण जैसे- आक्सीजन सिलेंडर, कंसीटेटर, व्हील चेयर, पलंग नेबुलाइजर, वाइपैप मशीन समेत अन्य सामान भी दिए जाते हैं। सिक्योरिटी जमा कराई जाती है। उपकरण की वापसी पर सिक्योरिटी राशि वापस कर दी जाती है।
- हेल्प आगरा की ओर से ओपीडी आन व्हील्स सेवा भी संचालित की जा रही है। इस गाड़ी में डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, जरूरी दवाएं और अन्य सामान होता है और यह गाड़ी बस्ती बस्ती जाकर लोगों का उपचार करती है। टीबी मरीजों पर फोकस रहता है। कोरोना काल में शासन ने भी इस गाड़ी का सहयोग लिया था। यह गाड़ी संस्था को एफमैक की ओर से दी गई थी।
- हेल्प आगरा को लायंस आइडियल ने लैप्रोस्कोपी मशीन दी। एलआईसी, स्टेट बैंक और संकल्प मैमोरियल ट्रस्ट ने एक-एक एम्बुलेंस दी। सर्राफा एसोसिएशन ने एक शव वाहन दिया। स्टोनमैन हेल्प फाउंडेशन, फार्माटेक, वैकमेट फाउंडेशन ने एक-एक आईसीयू एम्बुलैंस प्रदान की। अब श्री रामलीला कमेटी की ओर से चार नवंबर को ईको एम्बुलैंस संस्था को भेंट की जाएगी।
ये रहे हैं प्रमुख चेहरे
हेल्प आगरा को यहां तक पहुंचाने में संस्थापक सदस्यों का योगदान तो है ही, अन्य तमाम लोग भी ऐसे हैं जिन्होंने अपना पूरा सहयोग दिया है। इनमें जूता कारोबारी सुनील मनचंदा, रश्मि मगन, नरेश जैन, राकेश अग्रवाल (दीनदयाल), सुरेंद्र मित्तल सुगंधी, मौजूदा महामंत्री किशन कुमार अग्रवाल के नाम उल्लेखनीय हैं।