अधिवक्ता की नजरबंदी पर पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट ने फटकारा  

आगरा। शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता महताब सिंह को हाउस अरेस्ट किए जाने का मामला आगरा पुलिस के गले की ऐसी फांस बन गई है कि यह न निगलते बन रही और न उगलते। अधिवक्ता की याचिका पर आज आगरा के डीसीपी सिटी सोनम कुमार और एसीपी हरीपर्वत हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए। इस दौरान हाईकोर्ट में दोनों अधिकारियों को न केवल फटकार मिली अपितु न्यायाधीश ने साफ-साफ कह दिया कि अगर सही जानकारी नहीं देंगे तो कोर्ट सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई करेगा।

Mar 18, 2025 - 23:05
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अधिवक्ता की नजरबंदी पर पुलिस अधिकारियों को हाईकोर्ट ने फटकारा   

-हाईकोर्ट ने कहा- अगली तारीख पर हाउस अरेस्ट कराने वाले का नाम न बताया तो सभी के खिलाफ कठोर कार्रवाई

-हर सुनवाई में मौजूद रहना होगा आगरा के पुलिस अधिकारियों को, अगली तारीख 27 मार्च नियत की गई

पिछले साल 15 नवंबर जब हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज आगरा सिविल कोर्ट का निरीक्षण करने आए थे, उस दौरान महताब सिंह एडवोकेट को दस घंटे तक हाउस अरेस्ट रखा गया था। अधिवक्ता महताब सिंह ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसी याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

हाईकोर्ट के आदेश पर आज आगरा के डीसीपी सिटी सोनम कुमार और एसीपी हरीपर्वत आज हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए। न्यायाधीश न्यायमूर्ति अश्वनी मिश्रा ने दोनों पुलिस अधिकारियों से वही सवाल पूछा कि किसके आदेश पर अधिवक्ता महताब सिंह को हाउस अरेस्ट किया गया था। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उन्हें जानकारी है कि आप दो ट्रेनी दरोगाओं को निलंबित करके यहां आए हैं। वे इससे संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि पुलिस की जीडी के रूप में पुलिस की रवानगी महताब सिंह एडवोकेट के घर रवानगी का रिकार्ड उनके पास मौजूद है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आपके पुलिस आयुक्त शपथ पत्र में कह रहे हैं कि पुलिस ने महताब सिंह को हाउस अरेस्ट नहीं किया जबकि जीडी में पुलिस की रवानगी दर्ज है। जज ने कहा कि उन्हें वह नाम बताएं जिसके कहने पर अधिवक्ता को हाउस अरेस्ट किया गया था। ट्रेनी दरोगाओं को निलंबित करने से कोर्ट संतुष्ट नहीं है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि कोर्ट को सही-सही बात बता दें। वह नाम बताएं जिसके आदेश पर अधिवक्ता को हाउस अरेस्ट किया गया। सही बात बता देंगे तो वे सभी को छोड़ देंगे, अन्यथा किसी को नहीं बख्शेंगे।

हाईकोर्ट जज के तल्ख तेवर देख दोनों पुलिस अधिकारियों की हालत खराब थी। इस पर पुलिस अधिकारियों ने जवाब देने के लिए कुछ दिन की मोहलत मांगी। कोर्ट ने अगली तारीख 27 मार्च नियत करते हुए कहा कि अगली बार आएं तो सही रिपोर्ट लेकर आएं। पुलिस अधिकारियों ने कोर्ट से प्रार्थना की कि उन्हें व्यक्तिगत पेशी से छूट दी जाए, लेकिन कोर्ट ने यह बात नहीं मानी और आदेश दिया कि हर तारीख पर उन्हें कोर्ट में पेश होना पड़ेगा।

ज्ञातव्य है कि हाईकोर्ट में पेश होने के लिए जाने से पहले डीसीपी सिटी इस मामले में दयालबाग पुलिस चौकी पर तैनात प्रशिक्षु दरोगा राहुल तोमर और रोहित को निलंबित करके गये थे। अधिकारियों ने सोचा था कि शायद इस कार्रवाई से मामला निपट जाएगा, लेकिन हाईकोर्ट के रुख देख उनकी समझ में आ चुका है कि मामला उनके गले की फांस बन चुका है।

SP_Singh AURGURU Editor