आगरा के उप निदेशक उद्यान धर्मपाल यादव के निलंबन पर हाईकोर्ट का स्टे, जांच प्रक्रिया जारी रहेगी
आगरा/लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उपनिदेशक उद्यान आगरा, डॊ. धर्मपाल सिंह यादव के निलंबन पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि 7 नवंबर, 2025 के विवादित आदेश पर अगले ऑर्डर तक रोक रहेगी, लेकिन यह रोक पिटीशनर या संबंधित यूनियन की शिकायत के तहत किसी भी डिसिप्लिनरी कार्रवाई को रोकने के लिए नहीं है।
जानकारी के अनुसार, 7 नवंबर को डॊ. धर्मपाल को उपनिदेशक पद से निलंबित किया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जहां से उन्हें स्थगन आदेश प्राप्त हुआ। निलंबन के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका में यह तर्क दिया गया कि आदेश केवल न्यूज़पेपर और सोशल मीडिया रिपोर्ट पर आधारित प्रारंभिक इन्क्वायरी रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया, जबकि पिटीशनर इन आरोपों में दोषी नहीं पाए गए थे।
हाईकोर्ट बेंच ने कहा कि निलंबन आदेश में स्पष्ट नहीं किया गया कि इन्क्वायरी रिपोर्ट के निष्कर्षों से डिसिप्लिनरी अथॉरिटी ने असहमति के कौन से पहलुओं को आधार बनाया। पिटीशनर के खिलाफ आरोप केवल सुपरवाइज़री कार्यों में लापरवाही तक सीमित हैं, जो मिसकंडक्ट नहीं माना जा सकता। ऐसे हालात में उत्तर प्रदेश गवर्नमेंट सर्वेंट (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स 1999 के तहत सस्पेंशन लेना अनुचित था।
कोर्ट ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता को किसी बड़ी सज़ा की संभावना डिसिप्लिनरी अधिकारी के विवेक पर निर्भर है और वर्तमान में केवल मामूली सज़ा निर्धारित करना नहीं कहा जा सकता। पिटीशनर के वकील रक्षितराज सिंह और आयुष अग्रवाल ने अपर मुख्य सचिव उद्यान और अन्य को पार्टी बनाया था। कोर्ट ने दूसरी पार्टी को चार हफ़्ते में काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में लिस्ट करने का निर्देश दिया।