18 साल बाद इंसाफ पर हाईकोर्ट की मुहर, अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार

अहमदाबाद। वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम धमाकों के बहुचर्चित मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को दी गई आजीवन कारावास की सजा में कोई बदलाव नहीं किया। इसके साथ ही अदालत ने मृतकों के परिजनों और घायलों को मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं। इस फैसले के साथ देश के सबसे बड़े आतंकी मामलों में से एक में लंबी न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा हुआ।

Jul 7, 2026 - 12:33
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18 साल बाद इंसाफ पर हाईकोर्ट की मुहर, अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्र कैद की सजा बरकरार

हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के वर्ष 2022 के फैसले को चुनौती देने वाली सभी अपीलों को खारिज कर दिया। अदालत ने माना कि निचली अदालत द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर सुनाई गई सजा में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इसके चलते सभी 49 दोषियों के खिलाफ विशेष अदालत का फैसला यथावत रहेगा।

अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि धमाकों में जान गंवाने वाले 56 लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। इसके अलावा गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये तथा अन्य घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश भी दिए गए हैं।

उल्लेखनीय है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। विस्फोट शहर के विभिन्न भीड़भाड़ वाले इलाकों में किए गए थे, जिससे पूरे शहर में अफरा-तफरी और दहशत फैल गई थी।

घटना के बाद जांच एजेंसियों ने व्यापक स्तर पर जांच अभियान चलाया और बड़ी मात्रा में साक्ष्य एकत्र किए। इस मामले में 80 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान 6,000 से अधिक दस्तावेज अदालत में पेश किए गए और 1,100 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। करीब 12 वर्षों तक चली सुनवाई के बाद विशेष अदालत ने फैसला सुनाया था।

फरवरी 2022 में विशेष अदालत ने 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जबकि शेष आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर बरी कर दिया गया था।

अब गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दोषियों की सभी अपीलें खारिज कर दी हैं। इस निर्णय को आतंकवाद से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है, जिसने यह संदेश दिया है कि गंभीर अपराधों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भी न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

SP_Singh AURGURU Editor