हिंदी केवल भाषा नहीं, राष्ट्र की आत्मा है: विश्व हिंदी दिवस पर गूंजा सांस्कृतिक स्वाभिमान

विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर आगरा में विगत दिवस आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी में हिंदी को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीयता और जीवन मूल्यों की जीवंत प्रतीक बताते हुए वक्ताओं ने दैनिक जीवन में हिंदी के अधिकतम प्रयोग को देशभक्ति का स्वरूप करार दिया। कार्यक्रम में हिंदी व्याकरण के प्रति घटती गंभीरता पर भी गहरी चिंता व्यक्त की गई।

Jan 11, 2026 - 21:48
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हिंदी केवल भाषा नहीं, राष्ट्र की आत्मा है: विश्व हिंदी दिवस पर गूंजा सांस्कृतिक स्वाभिमान
हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में मौजूद डॊ. देवी सिंह नरवार एवं अन्य।

आगरा। वायु विहार स्थित राज राजेश्वरी रिसोर्ट में शनिवार को विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर अंतरराष्ट्रीय हिंदी साहित्य भारती द्वारा एक भव्य साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हिंदी साहित्य भारती के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. देवी सिंह नरवार और विशिष्ट अतिथि ब्रज प्रांत अध्यक्ष डॉ. अनूप शर्मा द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ किया गया।

डॉ. देवी सिंह नरवार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी भारतीय संस्कृति, संस्कार, राष्ट्रीयता और जीवन मूल्यों की प्रतीक है। हिंदी विश्व की सबसे समृद्ध, सशक्त और मधुर भाषा है, जो विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे स्थान पर है। उन्होंने देवनागरी लिपि की विशेषता बताते हुए कहा कि हिंदी में जो लिखा जाता है, वही पढ़ा और बोला जाता है, जबकि अंग्रेजी में अनेक अक्षर मौन रहते हैं। यहां तक कि हिंदी की बिंदी भी बोलती है।

डॉ. नरवार ने कहा कि हिंदी में शब्दों का विशाल भंडार है, जहां एक शब्द के अनेक पर्यायवाची और अनेकार्थ संभव हैं। यह भाषा मनोभावों की अभिव्यक्ति में अत्यंत सशक्त, अद्भुत और सुदृढ़ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दैनिक जीवन में अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करना भी एक प्रकार की देशभक्ति है।

उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज छात्रों को हिंदी व्याकरण का समुचित ज्ञान नहीं दिया जा रहा है। 11 से 14 वर्ष की आयु के छात्रों को संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, कर्ता, कर्म, मुहावरे, लोकोक्तियाँ, पर्यायवाची शब्द, विलोम शब्द, विराम, अर्द्धविराम और शुद्ध वर्तनी का व्यावहारिक ज्ञान देने के लिए संस्थागत स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. अनूप शर्मा ने कहा कि हिंदी केवल हमारी मातृभाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता की पहचान है। इसके प्रभाव और स्वीकार्यता को बढ़ाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को हिंदी को अपनाना होगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह चाहर ने की, जबकि संचालन संरक्षक राजवीर सिंह चाहर द्वारा किया गया। इस अवसर पर सुरेश चाहर, एडवोकेट रवि चौधरी, नीरज ठैनुआ, नरेश शर्मा, सत्यवीर सिंह, दीपक सिंह, अनिल शर्मा, राहुल भूषण शर्मा, आकाश चौधरी, नरेंद्र चौधरी, सुधीर कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, शिक्षाविद और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।