गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहादत वर्षगांठ पर आगरा से दिल्ली तक ऐतिहासिक नगर कीर्तन, गुरुद्वारा गुरु का ताल में हुआ पोस्टर विमोचन
आगरा। सिख धर्म के नौवें गुरु हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज और उनके तीन महान सिखों भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहादत शताब्दी वर्ष विश्वभर में अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी का आगरा से विशेष ऐतिहासिक संबंध रहा है। उनकी गिरफ्तारी सहित कई महत्वपूर्ण चरण आगरा की धरा पर संपन्न हुए, जिसके कारण यह वर्ष सिख इतिहास में और अधिक उल्लेखनीय बन गया है।
24 व 25 नवंबर को गुरुद्वारा माईथान और गुरु का ताल में विशेष कीर्तन समागम
आगरा। सिख धर्म के नौवें गुरु हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी महाराज और उनके तीन महान सिखों भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाला जी की 350वीं शहादत शताब्दी वर्ष विश्वभर में अत्यंत भव्यता और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। गुरु तेग बहादुर साहिब जी का आगरा से विशेष ऐतिहासिक संबंध रहा है। उनकी गिरफ्तारी सहित कई महत्वपूर्ण चरण आगरा की धरा पर संपन्न हुए, जिसके कारण यह वर्ष सिख इतिहास में और अधिक उल्लेखनीय बन गया है।
इसी उपलक्ष्य में गुरुद्वारा गुरु का ताल और गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, माईथान द्वारा आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों का पोस्टर विमोचन आज संयुक्त रूप से गुरुद्वारा गुरु का ताल में किया गया। गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया कि गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए अपने शीश का बलिदान दिया। तिलक, जनेऊ और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए उन्होंने मुगल सल्तनत के अत्याचारों का सामना किया। इसलिए उन्हें हिंद की चादर कहा जाता है। उनकी शहादत न केवल सिख इतिहास बल्कि संपूर्ण भारतीय सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर है।
आगरा से दिल्ली तक निकलेगा नगर कीर्तन
गुरुद्वारा माईथान के प्रधान कमलदीप सिंह ने जानकारी दी कि 22 नवंबर को आगरा के गुरु का ताल से गुरु महाराज के शहादत स्थल दिल्ली के गुरुद्वारा शीशगंज साहिब तक ऐतिहासिक नगर कीर्तन निकलेगा। 350 वर्ष पूर्व इसी मार्ग से गुरु महाराज को गिरफ्तारी के बाद दिल्ली ले जाया गया था।
नगर कीर्तन की विशेषताएं
नगर कीर्तन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की अत्यंत सुन्दर पालकी, पंज प्यारे साहिबान, निशानची जत्थे, लगभग 15 गुरुद्वारों के रागी जत्थे, 15 बसें व 50 से अधिक वाहन शामिल होंगे। सभी वाहनों पर निशान साहिब होगा। नगर कीर्तन सुबह 6:00 बजे गुरु का ताल से रवाना होकर मथुरा, कोसी, पलवल, फरीदाबाद होते हुए लाल किला पहुँचेगा। जहां से संगत पैदल गुरुद्वारा शीशगंज साहिब जाएगी। उसी शाम 6 बजे वापसी और लगभग रात 10 बजे आगरा आगमन का लक्ष्य निर्धारित है। गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों के पुलिस प्रशासन से समन्वय पूर्ण हो चुका है।
24 व 25 नवंबर के विशाल समागम
24 नवंबर को गुरुद्वारा माईथान में सुबह 7:00 बजे से दोपहर 2:30 बजे तक विशाल कीर्तन समागम होगा। 25 नवंबर को गुरुद्वारा गुरु का ताल पर विशाल समागम होगा। जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौरिया और महंत हरपाल सिंह के अनुसार सुबह 9:00–12:00 बजे सहज पाठ होगा। लगभग 100 परिवारों द्वारा शुरू किए गए सहज पाठ का सामूहिक समापन होगा। शाम का दीवान भाई नंदलाल हॉल में रात 7:00 PM – 12:00 सजेगा। दलजीत सिंह सेतिया और गुरमीत सेठी ने बताया कि नगर कीर्तन को अनुशासित, सुरक्षित और मर्यादापूर्ण रखते हुए सभी प्रबंध पूरे हो चुके हैं।
संगत से अपील
संत बाबा प्रीतम सिंह ने आगरा की संगत से कहा कि 22 नवंबर की सुबह 6 बजे तक गुरु का ताल पहुँचकर नगर कीर्तन में शामिल हों, ताकि यह ऐतिहासिक यात्रा समय से प्रारंभ हो सके। समारोह में जसपाल सिंह चावला, परमजीत मक्कड़, श्याम भोजवानी, प्रवीण अरोड़ा, बंटी ग्रोवर, परमजीत सिंह सरना, लकी सेठिया, पाली सेठी सहित कई प्रमुख सेवादार उपस्थित रहे।