होर्मुज खुला, एलपीजी, पेट्रोल- डीजल के सस्ता होने का इंतजार, सरकार कर रही स्थिति की समीक्षा
सरकार धीरे-धीरे उन इमरजेंसी उपायों को वापस ले सकती है, जिन्हें पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया था। ग्लोबल स्थिति सामान्य होने पर इन्हें वापस लिए जाने की संभावना है। यह जानकारी एक सरकारी अधिकारी ने दी है। यानी दोबारा पहले जैसी स्थितियां बहाल हो सकती हैं।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के जवाब में सरकार ने कई कदम उठाए थे। ऐसे शुरू किए गए इमरजेंसी एनर्जी-सिक्योरिटी उपायों की सरकार समीक्षा कर सकती है। ग्लोबल स्थिति सामान्य होने पर उन्हें धीरे-धीरे वापस लिए जाने की उम्मीद है। एक सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
एहतियाती उपायों में एलपीजी सप्लाई की बेहतर निगरानी, घरेलू नेचुरल गैस आवंटन को फिर से प्राथमिकता देना और फ्यूल की जमाखोरी रोकने के लिए कड़े नियंत्रण शामिल हैं। ये उपाय वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन में संभावित रुकावटों की चिंताओं के बीच घरेलू ऊर्जा उपलब्धता को सुरक्षित करने के लिए शुरू किए गए थे।
अमेरिका और ईरान ने उस अंतरिम समझौते का टेक्स्ट जारी किया है, जिस पर उनके राष्ट्रपतियों ने अपने 111 दिन के युद्ध को खत्म करने के लिए हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते शिपिंग को फिर से शुरू या सामान्य कर सकता है। इससे भारत को बड़ी राहत मिलेगी। वह दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल (क्रूड) के आयातकों में से एक है।
अधिकारी ने कहा, 'हम बदलती स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं। जब हमें भरोसा हो जाएगा कि वैश्विक स्तर पर स्थिति सामान्य हो गई है तो हमने जो उपाय किए थे, उनकी समीक्षा की जाएगी। उनमें ढील दी जाएगी।'
इमरजेंसी उपाय एहतियाती प्रकृति के थे। इनका मकसद भू-राजनीतिक अनिश्चितता के दौर में जरूरी फ्यूल की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित करना था। अधिकारी के अनुसार, 'जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय स्थिति सामान्य होगी और सप्लाई से जुड़े जोखिम कम होंगे, सरकार इन प्रतिबंधों की समीक्षा करेगी। उन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाने पर विचार किया जाएगा।'
फरवरी के अंत में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग से कच्चे तेल (पेट्रोल-डीजल जैसे फ्यूल बनाने के लिए कच्चा माल) और नेचुरल गैस (बिजली पैदा करने, फर्टिलाइजर बनाने, गाड़ियों को चलाने के लिए सीएनजी में बदलने और घरों की रसोई में खाना पकाने के लिए पाइप से सप्लाई करने के लिए इस्तेमाल होने वाला फीडस्टॉक) की सप्लाई बाधित हो गई थी। इससे कच्चे तेल की कीमतों, शिपिंग इंश्योरेंस प्रीमियम और माल ढुलाई दरों में भारी बढ़ोतरी हुई थी।
सूत्रों ने कहा कि होर्मुज के फिर से खुलने और तनाव कम होने से भारत जैसे ऊर्जा-आयात करने वाले देशों के लिए स्थिति को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। यह वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिर करने में मददगार साबित हो सकता है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। उसने पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद घरेलू फ्यूल सप्लाई को सुरक्षित करने के लिए कई आपातकालीन उपाय शुरू किए थे। यह क्षेत्र देश के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का एक बड़ा हिस्सा है।