जगदीशपुरा पुलिस ने पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म को इतने हल्के में कैसे ले लिया?
आगरा। एक धार्मिक स्थल के अंदर पांच वर्ष की एक मासूम बालिका से दुष्कर्म के मामले में जगदीशपुरा थाना पुलिस ने हालांकि अपनी गलती सुधार ली है, लेकिन सवाल ये उठता है कि पहली मर्तबा गिरफ्त में आने के बाद भी पुलिस ने अभियुक्त को छोड़ क्यों दिया था जबकि पीड़ित बच्ची आपबीती पुलिस को बता चुकी थी। इस दरिंदे की वहशी हरकत ने हर किसी को झकझोर दिया है।
पांच वर्ष की पीड़िता को वह वहशी बहला फुसलाकर तब धार्मिक स्थान के अंदर ले गया जब वह घर के बाहर खेल रही थी। वहां यह बच्ची का मुंह दबाकर दुष्कर्म करने लगा। बच्ची की चीख सुनकर उसकी दादी धर्मस्थल के अंदर पहुंची तो आरोपी दादी को धक्का मारकर भाग खड़ा हुआ। दादी के शोर मचाने पर आसपास मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और उसकी पिटाई की। बाद में इसे पुलिस के हवाले कर दिया।
पब्लिक को जो करना चाहिए था, वह किया, लेकिन पुलिस ने भी क्या वही किया, जो करना चाहिए, जवाब है नहीं। पुलिस ने इसी रात आरोपी की पागल बताकर थाने से छोड़ दिया। परिवार की आपत्ति के बाद बालिका के कोर्ट में बयान दर्ज कराए तो वहां भी उसने वही सब कुछ बताया जो पुलिस को बताया था। इसके बाद शायद पुलिस को गलती का अहसास हुआ और आरोपी की फिर से गिरफ्तारी करने के बाद उसे जेल भेजा।
आरोपी सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुआ था। सवाल यह उठता है कि बगैर किसी जांच के पुलिस ने कैसे मान लिया कि आरोपी पवित्र उर्फ पम्मी पागल है और दूसरी बात ये कि पांच साल की बच्ची ने जो कुछ बताया, पुलिस ने उस पर अविश्वास कैसे किया।