धनवी कैसे भुला पाएगी वह मंजर, उसे अब न तीनों भाई दिखेंगे और न ही मां और चाची
आगरा। तीन भाइयों और दो बहनों के परिवार में धनवी और उसकी बड़ी बहन को अब न तो अपने भाई दिखेंगे और न ही मां। चाची भी कहीं नजर नहीं आएंगी। किशोरवय बालिका धनवी उस मंजर को कैसे भुला पाएगी जब उसने अपनी आंखों के सामने अपनों को दम तोड़ते देखा। पिता और चाचा की तरह वह खुद भी बुरी तरह घायल अवस्था में अस्पताल में उपचारत है।
धनवी नटराजपुरम, कमला नगर के उस परिवार की बेटी है जो बीते कल हाथरस जिले के चांदपा थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था। हार्डवेयर कारोबारी अनुज अग्रवाल और उनके भाई सौरभ अग्रवाल परिवार के सदस्यों के साथ नरौरा में गंगा स्नान करने गए थे। बेलोन भवानी के दर्शन कर आगरा लौटते समय चन्दपा क्षेत्र में इनकी कार पेड़ से टकराकर खाई में पलट गई थी। हादसे में दोनों भाइयों की पत्नियों और तीन बेटों की मौत हो गई थी। धनवी की बड़ी बहन दादी की देखभाल के लिए आगरा ही रुक गई थी।
दिवाली के मौके पर इस परिवार को ऐसा दर्द मिला है कि परिवार के बाकी सदस्य शायद ही कभी इसे भुला पाएं। हाथरस प्रशाशन ने कल ही पांचों मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार कर दिया था। दो महिलाओं और तीन बच्चों के शव जब उनके आगरा स्थित घर पर पहुंचे तो कोहराम मच गया। हर किसी की आंखों में आंसू थे। पांच अर्थियों को एक साथ उठाया गया तो हर किसी का कलेजा मुंह को आ गया। श्मशान घाट पर हादसे में कम घायल हुए अनुज अग्रवाल ने सभी का अंतिम संस्कार किया।
एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत ने पूरे क्षेत्र को त्यौहार पर गम में डुबो दिया था। बूढ़ी मां तो बदहवास जैसी हालत में है। अनुज अग्रवाल की बड़ी किशोरवय बेटी जो दादी की देखभाल के लिए घर ही रुक गई थी, रोते रोते सभी को संभाल भी रही थी। अनुज और सौरभ की मां कभी नातियों तो कभी बहुओं के नाम पुकारती हैं लेकिन उन्हें कोई नजर नहीं आता। आसपास के लोग और नाते रिश्तेदार घर पर ढाढस बंधाने में लगे हुए हैं।
गौरतलब है कि कमला नगर के नटराजपुरम निवासी हार्डवेयर कारोबारी अनुज अग्रवाल अपनी टीयागो कार से बुलंदशहर में स्थित बैलोन भवानी माता के मंदिर से दर्शन कर घर आ रहे थे। गाड़ी अनुज अग्रवाल खुद चला रहे थे। गाड़ी के एयरबैग खुलने से आगे बैठे अनुज और उनके भाई सौरभ की जान बच गई, जबकि पीछे की सीट पर बैठी दोनों भाइयों की पत्नियों तथा तीन बेटों की मौत हो गई थी।
क्षेत्रीय पार्षद प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि अनुज अग्रवाल स्वभाव के काफी अच्छे इंसान हैं। वह काफी मिलनसार हैं। हादसे की जानकारी होते ही वह खुद उनके घर पह़ुंच गए थे। परिजनों का हाल बेहाल था। पूरी कॉलोनी गमगीन थी।
अग्रवाल परिवार में बच्चों के रूप में अब केवल दो बेटियां
हादसे का शिकार हुई गाड़ी में दो सगे भाई अनुज और उनके छोटे भाई सौरभ अग्रवाल का परिवार सवार था। दोनों भाईयों के अलावा अनुज की पत्नी सोनम और बेटी धनवी, बेटा निताई, सौरभ की पत्नी रुबी और उनके दो बेटे गौरांग और चेतन सवार थे। हादसे में दोनों भाइयों की पत्नियों सोनम और रुबी के साथ ही वंश दोनों भाइयों के तीनों बेटों निताई, चेतन और गौरांग की मौत हो गई थी। हादसे में घायल धन्वी और सौरभ का अभी अस्पताल में ही इलाज चल रहा है।
बताया गया है कि अनुज अग्रवाल के दो बेटियां थीं और सौरभ के तीन लड़के थे। सौरभ के बेटे को अनुज अग्रवाल ने गोद ले लिया था। हादसे में तीनों बेटों की मौत के बाद इस परिवार में बच्चों के नाम पर अब केवल दो बेटियां ही हैं।