कफन खरीद लिया था, जिंदगी वापस मिली है, ईरान से लौटे बरेली के जायरीन ने सुनाई दहशत की दास्तां
ईरान की जियारत से लौटे बरेली के जायरीनों ने वहां बिताए भयावह दिनों की आपबीती साझा की। मिसाइलों की आवाज, धमाकों और फ्लाइट रद्द होने से डर के साए में दिन गुजारे। कई जायरीन ने कफन तक खरीद लिया था। भारतीय दूतावास की मदद से सभी सकुशल लौटे। वतन लौटकर तिरंगे से स्वागत हुआ, जिससे भावुक होकर सबने प्रधानमंत्री मोदी और ईरान सरकार का आभार जताया।
-जियारत से लौटे जायरीनों ने वतन की मिट्टी को चूमा, खुदा और मोदी का किया शुक्रिया
-आरके सिंह-
बरेली। ईरान की जियारत से लौटे बरेली के जायरीन जब दिल्ली एयरपोर्ट पर तिरंगे के साथ स्वागत पाकर अपने देश लौटे तो आंखें नम थीं और दिल सुकून से भरा हुआ। ईरान में बिताए गए चार दिन उनके लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं थे। सिर के ऊपर उड़ती मिसाइलें, चारों तरफ धमाकों की गूंज और बंद एयरपोर्ट, यह सब उन्हें हर पल मौत के करीब ले जा रहा था।
कफन तक खरीद लिया था- नजमा बेगम की आपबीती
बरेली के कंघी टोला की नजमा बेगम ने बताया, चार दिन ऐसे थे, जैसे अब कभी घर लौटना मुमकिन नहीं। जहां ठहरे थे, वहीं से आसमान में मिसाइलें उड़ती दिखती थीं। दिल बैठ गया था, लेकिन खुदा पर भरोसा था। सोच लिया था कि अगर मौत आई, तो शहादत समझकर कबूल कर लेंगे। यहां तक कि हमने कफन तक खरीद लिया था।
फ्लाइट कैंसिल की खबर से कांप गया दिल- रुखसार नकवी
थाना बारादरी क्षेत्र की रुखसार नकवी ने बताया, जब फ्लाइट कैंसिल होने की खबर मिली तो मानो जमीन खिसक गई। नींद उड़ गई थी। बस एक ही दुआ थी कि किसी भी तरह अपने वतन लौट जाएं। भारतीय दूतावास की मदद से हमें कोम से मशद पहुंचाया गया और फिर सुरक्षित लौटने का रास्ता बना।
लोग मिसाइलों के वीडियो बना रहे थे, हम सहमे हुए थे- हसन जाफर
थाना प्रेमनगर क्षेत्र के हसन जाफर ने बताया, स्थानीय लोग तो मिसाइलों की उड़ान के वीडियो बना रहे थे, जबकि हम भारतीय जायरीन हर धमाके के साथ कांप जाते थे। एयरपोर्ट पर मोबाइल बंद करवा दिए गए थे। हर कोई खुदा से वतन वापसी की दुआ कर रहा था।
दिल्ली एयरपोर्ट पर तिरंगे ने रुला दिया- मुजीब जहरा
किला क्षेत्र की मुजीब जहरा ने भावुक होते हुए कहा, दिल्ली एयरपोर्ट पर जब तिरंगे से स्वागत हुआ, तो लगा जैसे फिर से जन्म मिला है। भारतीय दूतावास के मीसम रजा और ईरान के मौलाना हैदर साहब ने हमारी बहुत मदद की। प्रधानमंत्री मोदी और ईरान सरकार का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं।
जिंदगी भर याद रहेंगे ये चार दिन
जायरीन बताते हैं कि वतन से दूर रहना, और उस माहौल में जीना, दोनों बेहद कठिन थे। अब जब सभी सकुशल लौट आए हैं, तो अपनों से मिलकर बहते आंसू ही उनकी असली राहत हैं। ये अनुभव उनकी जिंदगी में हमेशा जिंदा रहेंगे।