मालगोदाम पर 2.3 हेक्टेयर में सिटी फॊरेस्ट बना तो यह आगरा के लिए वरदान होगा
आगरा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी की सिफारिश को अगर सुप्रीम कोर्ट ने मान लिया तो गधापाड़ा (बेलनगंज) जैसे घनी आबादी वाले एरिया में सिटी फॊरेस्ट आकार लेगा। इसकी प्रबल पैरोकारी पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता कर रहे हैं। सिटी फॊरेस्ट ने आकार लिया तो यह आगरा के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।
गधापाड़ा मालगोदाम की जमीन बिल्डर को आवासीय प्रोजेक्ट के लिए लीज पर देने की जानकारी सामने आने के बाद शहर के पर्यावरणप्रेमियों का ध्यान इस ओर गया था। रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल ने मालगोदाम की जमीन पर आवासीय प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए यहां सिटी फॊरेस्ट विकसित करने की आवाज उठाई थी।
बृज खंडेलवाल का तर्क था कि मालगोदाम की जमीन आगरा शहर की जमीन है, जिसे ब्रिटिश काल में मालगोदाम के लिए दे दिया गया था। अब जबकि यह जमीन रेलवे के उपयोग में नहीं आ रही है तो उसे यह जमीन आगरा शहर को ही लौटा देनी चाहिए।
पर्यावरणविद डॊ. शरद गुप्ता इस मामले को लेकर सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए। उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सीईसी के पास भेज दिया। सीईसी की तीन बैठकें हुईं। हर बैठक में डॊ. शरद गुप्ता ने रेलवे मालगोदाम की जमीन का उपयोग शहरवासियों के हित में करने पर जोर दिया था। सीईसी सदस्यों के पूछने पर डॊ. गुप्ता ने सुझाव दिया था कि यहां एक हिस्से में सिटी फॊरेस्ट विकसित कर दिया जाए।
डॊ. शरद गुप्ता ने सीईसी की बैठकों में कहा था कि हमारे शहर के बच्चों के खेल के मैदान छीन लिए गए हैं। उन्होंने पीएसी ग्राउंड, आगरा कॊलेज खेल मैदान, आरबीएस कॊलेज खेल मैदान समेत कई अन्य का जिक्र करते हुए बताया खा कि मेट्रो परियोजना की वजह से बच्चों के खेलने की जगह नहीं बची है, इसलिए मालगोदाम की जमीन पर खेलने का मैदान और एक हिस्से में सिटी फॊरेस्ट विकसित किया जाए।
अब सीईसी ने जो रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को दी है, उसमें मालगोदाम की कुल जमीन में से 2.3 हेक्टेयर जमीन पर सिटी फॊरेस्ट विकसित करने की सिफारिश की गई है।