यूपी के शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की जांच हुई तो राम मंदिर मामले से भी बड़ा घोटाला सामने आएगा, मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी का बड़ा दावा
बरेली। आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और वक्फ संपत्तियों की कथित अवैध बिक्री के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई जमीनों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। मौलाना ने दावा किया कि यदि निष्पक्ष जांच कराई गई तो राम मंदिर चढ़ावा चोरी से भी बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने जारी बयान में कहा कि वक्फ की जमीनों और जायदाद की खरीद-फरोख्त का कथित अवैध कारोबार समाजवादी पार्टी की सरकारों के दौरान सबसे अधिक बढ़ा। उनका आरोप है कि जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार सत्ता में रही, तब-तब सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोगों ने सरकार के संरक्षण में वक्फ संपत्तियों का सौदा किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में मौलाना ने समाजवादी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव वर्ष 1989-1991, 1993-1995 और 2003-2007 तक तीन बार मुख्यमंत्री रहे, जबकि उनके पुत्र अखिलेश यादव वर्ष 2012 से 2017 तक मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के चारों कार्यकाल में आजम खां के पास अधिकांश समय अल्पसंख्यक, वक्फ और हज मंत्रालय रहे और उनकी पसंद के लोगों को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन एवं सदस्य बनाया जाता रहा।
मौलाना ने कहा कि उनके अनुसार जुफर अहमद फारूकी वर्ष 2000-2001 तथा 2010 से 2026 तक, अमीर आलम वर्ष 2001-2003 तक और हाफिज उस्मान वर्ष 2004-2009 तक सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कार्यकालों में मनमाने तरीके से वक्फ बोर्ड के भीतर गड़बड़ियां हुईं और वक्फ की जमीनों का बड़े पैमाने पर सौदा किया गया।
मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि वक्फ की जमीनें उनके पूर्वजों ने गरीबों, कमजोरों, लाचारों और यतीमों की भलाई के लिए दान की थीं, ताकि उनकी आय से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और मदरसों का निर्माण एवं संचालन हो सके। लेकिन कथित वक्फ माफिया और जिम्मेदार पदाधिकारियों ने इस उद्देश्य को नुकसान पहुंचाते हुए वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग किया।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि वक्फ बोर्ड द्वारा बेची गई सभी जमीनों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मौलाना ने दावा किया कि यदि वक्फ की आय का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो देश के गरीब मुसलमानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार आ सकता है और कोई भी मुसलमान भीख मांगने के लिए मजबूर नहीं होगा।
मौलाना ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही जांच के आदेश देंगे, जिससे वक्फ संपत्तियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ सके।