भारत माता को डायन कहोगे तो सहन नहीं करेंगे- कल्कि धाम पहुंचे स्वामी रामभद्राचार्य का तीखा संदेश
सम्भल में विश्व की प्रथम श्री कल्कि कथा के शुभारंभ से पूर्व पहुंचे पद्मविभूषित जगद्गुरु रामानंदाचार्य तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य ने भारत माता, गंगा और गौ माता का अपमान करने वालों को दो टूक चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि भारत माता को ‘डायन’ कहने जैसी अमर्यादित बातों को संत समाज कभी सहन नहीं करेगा। कल्कि धाम में उनके आगमन पर श्रद्धालुओं में गहरी उत्सुकता रही।
-रमेश कुमार सिंह-
सम्भल। सोमवार को श्री कल्कि धाम में आयोजित होने जा रही विश्व की प्रथम श्री कल्कि कथा से पहले पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने धर्म, राष्ट्र और सनातन पर स्पष्ट और प्रखर स्वर में अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत माता को माता कहो, गंगा माता को माता कहो, गौ माता को माता कहो। भारत माता को डायन कहोगे तो हम सहन नहीं करेंगे।
पत्रकारों के प्रश्न पर कि श्री कल्कि कथा का मुख्य संदेश क्या होगा, उन्होंने कहा कि स्वयं जीओ, साथ रहो और दूसरों को भी जीने दो। यहां अकबर या बाबर बनकर नहीं, तुलसीदास, सूरदास और कबीरदास की भावना से जीने का मार्ग है।
धर्मसभा में उपस्थित लोगों ने उनके कथनों का समर्थन करते हुए जोरदार जयकारे लगाए।
कल्कि धाम में महोत्सव का शुभारंभ
श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने निमंत्रण पत्र के माध्यम से बताया कि श्री कल्कि महोत्सव 2025 का आयोजन सम्भल की पावन भूमि पर 1 से 7 दिसंबर तक किया जा रहा है। यह वही धरा है, जिसे भगवान श्री हरि विष्णु के दशम अवतार ‘श्री कल्कि’ की अवतरण स्थली माना जाता है।
उन्होंने कहा कि 18 वर्षों से चल रही यह आध्यात्मिक यात्रा आज सनातन संस्कृति का एक महापर्व बन चुकी है।
मोदी द्वारा भूमि पूजन का उल्लेख
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने बताया कि 19 फरवरी 2014 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमुख संतों की उपस्थिति में श्री कल्कि धाम का भूमि पूजन और शिलान्यास कर इस बहुप्रतीक्षित धाम के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। यह कार्य करोड़ों सनातनियों की भावनाओं का सम्मान था।
पद्मविभूषित, अनंतश्री विभूषित तुलसीपीठाधीश्वर श्री स्वामी रामभद्राचार्य आगामी दिनों में श्री कल्कि पुराण पर आधारित कथा का वाचन करेंगे। देशभर से श्रद्धालु इस अमृतमयी कथा का श्रवण करने हेतु सम्भल पहुंच रहे हैं।