पाकिस्तान में इमरान खान समर्थकों का उबाल जारी, हर मंगलवार को जेल और हाईकोर्ट के सामने प्रदर्शन का ऐलान

पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से जेल मुलाक़ात पर लगातार रोक के चलते पाकस्तान तहरीक ए इंसाफ पार्टी के समर्थकों का आक्रोश लगातार उफान पर है। खान के परिवार और वकीलों को कई हफ्तों से मिलने की अनुमति न दिए जाने पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। रावलपिंडी की अडियाला जेल के बाहर इमरान की पार्टी (पीटीआई) कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन किया। समर्थकों का आरोप है कि खान को एकांत कोठरी में रखा गया है और उनकी सेहत तथा सुरक्षा को लेकर अत्यधिक चिंता है।

Nov 28, 2025 - 13:34
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पाकिस्तान में इमरान खान समर्थकों का उबाल जारी, हर मंगलवार को जेल और हाईकोर्ट के सामने प्रदर्शन का ऐलान

दो दिन पहले पीटीआई के कार्यकर्ता इमरान खान से परिजनों और वकीलों को न मिलने देने को लेकर सड़कों पर आ गए थे। इस दौरान इमरान की जेल में मौत होने की अफवाहें भी फैलने लगीं तो इमरान समर्थकों में उबाल आ गया था। तनाव बढ़ने पर जेल प्रशासन ने एक बयान जारी कर कहा था कि इमरान खान पूरी तरह स्वस्थ हैं।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी बहनों और उनके वकील को इमरान खान से नहीं मिलने दिया जा रहा। इसी को लेकर पीटीआई के नेतृत्व ने अब ऐलान किया है कि अब हर मंगलवार इस्लामाबाद उच्च न्यायालय और रावलपिंडी जेल के बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन होंगे, जब तक कि केस की सुनवाई में तेजी और खान की रिहाई पर स्पष्टता नहीं मिलती। सोशल मीडिया पर ‘26 नवंबर नहीं भूलेंगे’ जैसे टैग ट्रेंड कर रहे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि समर्थक पुराने आंदोलनों की तरह एक व्यापक, पुनर्जीवित प्रदर्शन लहर की तैयारी में हैं।

स्थिति जितनी राजनीतिक है, उतनी ही सामाजिक भी। पार्टी इसे व्यक्तिगत गिरफ्तारी नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रतिशोध का प्रतीक बता रही है। पंजाब, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध सहित कई प्रांतों में पीटीआई अपने समर्थकों को सक्रिय मोड में ला रही है, जिससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की संभावना बढ़ गई है।

सरकार और सुरक्षा एजेंसियाँ हालात पर कड़ी नज़र रखे हुए हैं और आवश्यकता पड़ने पर कर्फ्यू या अतिरिक्त प्रतिबंध की तैयारी में हैं। लेकिन हर नए कदम से समर्थकों में असंतोष और तेज़ हो रहा है।

आगे आने वाले दिनों में यह संकट और गहराने की आशंका है, यदि अदालतें मामले पर तेजी नहीं दिखातीं, तो विरोध स्थायी धरनों, रैलियों और देशव्यापी आंदोलन का रूप ले सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं का दबाव भी बढ़ रहा है, जिससे सरकार पर पारदर्शिता व प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने का दबाव और तीव्र हो सकता है।

कुल मिलाकर पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के मुहाने पर खड़ी है और यह पूरा संकट आने वाले समय में सत्ता संतुलन और स्थिरता दोनों को चुनौती दे सकता है।

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SP_Singh AURGURU Editor