भारत में तुर्किए का बायकाट, भारतीय करेंगे तुर्किए को कंगाल

नई दिल्‍ली। भारत में तुर्की के खिलाफ जबरदस्‍त गुस्‍सा है। इसने हाल में आतंकी पाकिस्‍तान के साथ खड़े होकर अपना असली चेहरा दिखा दिया है। अब भारतीय इस पर अपनी कमाई की एक फूटी कौड़ी खर्च नहीं करना चाहते हैं। इसका बिगुल बज गया है। पुणे के व्यापारियों ने तुर्की से सेब खरीदना बंद कर दिया है। इसके बजाय वे हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीद रहे हैं। तुर्की के सेबों का कारोबार आमतौर पर एक सीजन में 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपये तक होता है। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर एक लेटर वायरल हुआ है। इसमें तुर्की ने भारतीय पर्यटकों से अपनी यात्रा रद्द न करने की अपील की है।

May 14, 2025 - 19:38
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भारत में तुर्किए का बायकाट, भारतीय करेंगे तुर्किए को कंगाल


जिस तरह तुर्की ने बेशर्मी के साथ पाकिस्‍तान का साथ दिया, उसके बाद भारत में लोग बहुत नाराज है। वे सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई ट्रैवल एजेंसियों जैसे ईजमाईट्रिप और कॉक्‍स एंड किंग्‍स ने भी तुर्की और अजरबैजान के ट्रैवल पैकेज रद्द कर दिए हैं।पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ किए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद, तुर्किये ने पाकिस्तान का समर्थन करते हुए उसे रक्षा उपकरण मुहैया कराए थे। ऐसे में देशभर में तुर्किये बहिष्कार किया जा रहा है। इसी कड़ी में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय ने भी एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। दरअसल, केंद्रीय विश्वविद्यालय ने तुर्किये के एक विश्वविद्यालय के साथ तीन साल की अवधि के लिए किए  गए समझौता ज्ञापन को रद्द कर दिया है। जेएनयू और इनोनू विश्वविद्यालय, तुर्किये के बीच समझौता ज्ञापन को अगली सूचना तक निलंबित कर दिया।

 पुणे की एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी के एक सेब व्यापारी ने बताया कि तुर्की के सेबों की मांग में भारी कमी आई है। उन्होंने कहा कि हमने तुर्की से सेब न खरीदने का फैसला किया है और हम हिमाचल, उत्तराखंड, ईरान और अन्य क्षेत्रों से सेब खरीदेंगे। यह फैसला हमारे देशभक्ति के कर्तव्य और देश के समर्थन में है।' उन्होंने 'ऑपरेशन दोस्त' का हवाला देते हुए यह भी कहा, 'जब तुर्की में भूकंप आया था तो भारत सबसे पहले उनकी मदद करने वाला देश था, लेकिन उसने पाकिस्तान का समर्थन किया।' स्थानीय फल व्यापारियों के अनुसार, तुर्की के सेबों की मांग लगभग 50% तक गिर गई है।

एक अन्य व्यापारी ने कहा, 'ग्राहक सक्रिय रूप से तुर्की के उत्पादों से बच रहे हैं, जिससे खुदरा स्तर पर भी इसका बहिष्कार हो रहा है।' यह रुझान तुर्की के राजनीतिक रुख के खिलाफ एक बड़े आंदोलन का हिस्सा है। इसकी पूरे भारत में आलोचना हो रही है। नागरिक स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध विकल्पों को चुन रहे हैं, जिससे बाजारों और खुदरा दुकानों पर बहिष्कार को बढ़ावा मिल रहा है।

यह कार्रवाई उन देशों के खिलाफ एक बढ़ते आर्थिक प्रतिरोध को दर्शाती है जो भारत के राष्ट्रीय हितों का समर्थन नहीं करते हैं। व्यापारियों और उपभोक्ताओं की ओर से तुर्की के आयात को अस्वीकार करने का फैसला राष्ट्रीय गौरव और भू-राजनीतिक माहौल के प्रति एक व्यावहारिक प्रतिक्रिया दोनों है। व्यापार अब उन क्षेत्रों और स्थानीय उत्पादों की ओर बढ़ रहा है जो भारत का समर्थन करते हैं।

वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्‍स पर तुर्की के पर्यटन विभाग का एक पत्र वायरल हो रहा है। इस पत्र में अंकारा ने भारतीय पर्यटकों की ओर से तुर्की के बहिष्कार का जिक्र किया है। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव के बीच पाकिस्तान का समर्थन करने के कारण भारतीय पर्यटक तुर्की का बहिष्कार कर रहे हैं। अपने पत्र में तुर्की के पर्यटन विभाग ने कहा है कि भारतीयों के पास देश की यात्रा को स्थगित या रद्द करने का कोई कारण नहीं है।

शिवसेना (उद्धव) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्‍स पर एक पोस्ट में लिखा कि भारतीय उस देश में पर्यटन पर पैसा खर्च नहीं करेंगे जो उसी पैसे का इस्तेमाल पाकिस्तान को हथियार देने के लिए करता है। चतुर्व अपने पर्यटकों को कहीं और ढूंढो, हमारा पैसा खून का पैसा नहीं है।' चतुर्वेदी की पोस्ट पर कमेंट करते हुए, एक यूज़र ने लिखा: 'अब पाकिस्तान से कटोरा लेकर पर्यटक आएंगे।'

केरल बीजेपी अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने भी इस पत्र को शेयर किया और लिखा: 'नहीं, धन्यवाद।' चंद्रशेखर की पोस्ट पर कमेंट करते हुए, एक यूजर ने लिखा: 'वे ऐसा दिखा रहे हैं जैसे हम किसी डर से या अवांछित महसूस करने के कारण तुर्की से बच रहे हैं। मेरे देशवासी आपके देश और आतंकवाद को आपके समर्थन को अस्वीकार कर रहे हैं।'

एक सोशल मीडिया यूजर ने कहा कि किसी भी भारतीय यूट्यूबर या इन्फ्लुएंसर को जो तुर्की को पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देते हुए दिखाई दे, उसे या तो अनदेखा किया जाना चाहिए या उसका बहिष्कार किया जाना चाहिए।

इस बीच, भारतीय ट्रैवल एजेंसियों ईजमाईट्रिप और कॉक्‍स एंड किंग्‍स ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बीच पाकिस्तान के समर्थन के कारण तुर्की और अजरबैजान के सभी ट्रैवल पैकेज रद्द कर दिए हैं। यह फैसला भारतीय कंपनियों के राष्ट्रीय दुश्मनों के खिलाफ राष्ट्रीय भावना के साथ जुड़ने के एक बड़े रुझान को दिखाता है।

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने केंद्र सरकार से तुर्किए के साथ सभी व्यापार समझौतों को तत्काल रद्द करने की मांग की है। राकेश टिकैत ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए कहा कि तुर्किए जैसे देश, जो आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों को हथियार सप्लाई करते हैं, उनके साथ आयात-निर्यात पर सख्ती बरती जानी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से तुर्किए से सेब आयात का मुद्दा उठाया, जिससे भारतीय किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।


किसान संगठनों ने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को भारतीय किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए. विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक नीतियों से भी जुड़ा है, जिस पर गंभीर विचार की जरूरत है.