भारत विश्वगुरु नहीं, विश्व मित्र बने, गांधी की विरासत पर पदयात्रियों ने जगाई लोकतंत्र की चेतना

सर्व सेवा संघ की राजघाट वाराणसी से राजघाट दिल्ली तक चल रही 1000 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक पदयात्रा के 41वें दिन आगरा कॉलेज, आगरा में गांधी विचार और लोकतंत्र की दिशा पर विशेष संवाद सभा आयोजित हुई। सभागार में हम विश्वगुरु नहीं, हम विश्व मित्र हैं और देश में बदलाव सिर्फ युवा वर्ग ही ला सकता है जैसे उद्बोधनों से पूरा परिसर गांधीवादी ऊर्जा से भर उठा। इस पूर्व पदयात्री संजय प्लेस स्थित शहीद स्मारक पर भी पहुंचे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

Nov 11, 2025 - 19:06
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भारत विश्वगुरु नहीं, विश्व मित्र बने, गांधी की विरासत पर पदयात्रियों ने जगाई लोकतंत्र की चेतना
वाराणसी से दिल्ली तक पदयात्रा निकाल रहे गांधीवादी मंगलवार को शहीद स्मारक पर। दूसरे चित्र में आगरा कॊलेज में आयोजित सभा में मौजूद पदयात्रा के नेतृत्वकर्ता।

आगरा। सर्व सेवा संघ द्वारा संचालित राजघाट वाराणसी से राजघाट दिल्ली तक की ऐतिहासिक पदयात्रा के 41वें दिन आगरा कॉलेज में एक प्रभावशाली सभा का आयोजन हुआ। कॉलेज का गंगाधर शास्त्री सभागार इस अवसर पर पूरी तरह खचाखच भरा रहा। यही वह सभागार है जहां कभी महात्मा गांधी और गणेश शंकर विद्यार्थी ने भी संवाद किया था।

कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के शिक्षकों द्वारा पारंपरिक साफा पहनाकर पदयात्रियों के स्वागत से हुआ। इस अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर सीके गौतम ने अध्यक्षता करते हुए कहा, बनारस से गांधी समाधि तक की यह पदयात्रा आज के समय में साहस और त्याग का प्रतीक है। जब लोग व्यस्त जीवन में सामाजिक सरोकारों से दूर हो रहे हैं, तब यह यात्रा हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।

सर्व सेवा संघ के मंत्री अरविंद अंजुम ने यात्रा के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह यात्रा 2 अक्टूबर से 26 नवम्बर तक चलेगी, जो 1000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। हम विरासत, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए निकले हैं। हमारी विचारधारा ‘विश्वगुरु’ बनने की नहीं, बल्कि विश्व मित्र बनने की है, जो शांति, प्रेम और सद्भावना का संदेश देती है। यही गांधी का भारत है।

सोमनाथ रोड, सर्वोदय समाज के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, युवाओं को अपनी आवाज़ बुलंद करनी होगी, क्योंकि बदलाव की शुरुआत वही कर सकते हैं। पदयात्रा संयोजक एवं उत्तर प्रदेश कर सेवा संघ के अध्यक्ष राम धीरज ने कहा, देश में भय का वातावरण है। यह सत्ता से उत्पन्न भय है। हमारी यात्रा का उद्देश्य है लोगों के भीतर से यह डर निकालना। जब जनता निर्भय होगी, तभी लोकतंत्र जीवित रहेगा।

सर्व सेवा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंदन पाल ने कहा, गांधी को तीन गोलियां लगी थीं, लेकिन वे गोलियां आज भी धर्मांधता, कट्टर राष्ट्रवाद और संकीर्ण राष्ट्रभक्ति के रूप में जनता को लग रही हैं। जो लोग समाज को मजहब और धर्म के नाम पर बांट रहे हैं, वही आज सत्ता में हैं। यही सबसे बड़ा खतरा है।

सामाजिक कार्यकर्ता सिस्टर फ्लोरीन ने सरकार की नीतियों पर प्रश्न उठाते हुए कहा, उत्तर प्रदेश में गांधी की विरासत पर ही नहीं, बल्कि आम जनता पर भी बुलडोज़र चलाया गया। यह तानाशाही प्रवृत्ति का प्रतीक है। जब सरकार जनता को ही घरों से बेघर कर दे, तो वह लोकतांत्रिक नहीं रह जाती।

सभा में किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष भारत सिंह, डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान, श्यामधर तिवारी, विष्णुधर शर्मा, हरीश चिमटी, अमित सिंह और अवधेश यादव ने भी विचार रखे।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. शशिकांत पांडे ने किया। मंच पर प्राचार्य डॉ. सी. के. गौतम के साथ प्रोफेसर पी. बी. झा, भूपेंद्र कुमार चिकारा, ए. के. सिंह, संतोष सिंह, डी. सी. मिश्रा, एस. के. दुबे, डॉ. विकास सिंह और डॉ. अनुराग पालीवाल सहित कई शिक्षाविद उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor