भारत का आईएनएस विक्रांत पहुंचा श्रीलंका, कोलंबो पोर्ट पर लगा मजमा

भारतीय नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत श्रीलंका के दौरे पर है। इस एयरक्राफ्ट कैरियर ने कोलंबो में लंगर डाला है। इसे आईएनएस विक्रांत का पहला विदेशी दौरा माना जा रहा है। इसे भारत और श्रीलंका के बीच सैन्य संबंधों का प्रतीक बताया जा रहा है।

Nov 26, 2025 - 20:03
Nov 26, 2025 - 20:07
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भारत का आईएनएस विक्रांत पहुंचा श्रीलंका, कोलंबो पोर्ट पर लगा मजमा

कोलंबो। भारतीय नौसेना का स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत श्रीलंका दौरे पर है। उसका कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया। यह आईएनएस विक्रांत का पहला विदेश दौरा भी है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब आईएनएस विक्रांत ऑपरेशनल तैनाती के बीच किसी विदेशी बंदरगाह पहुंचा है। आईएनएस विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर श्रीलंकाई नौसेना के आने वाले इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2025 में शामिल होने के न्योते पर कोलंबो पहुंचा है।

आईएनएस विक्रांत के कोलंबो बंदरगाह पर पहुंचने पर उसे देखने वाले लोगों की भीड़ लग गई। इस विशालकाय युद्धपोत के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में श्रीलंकाई और भारतीय प्रवासी नागरिक बंदरगाह पहुंच रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे भी शामिल हैं। इसे भारत की समुद्री डिप्लोमेसी का हिस्सा बताया जा रहा है, जो हिंद महासागर के देशों पर आधारित है। भारत लगातार श्रीलंका को आर्थिक मदद भी दे रहा है, ताकि आर्थिक रूप से बदहाल हो चुका यह पड़ोसी फिर अपने पैरों पर खड़ा हो सके।  

आईएनएस विक्रांत को 2022 में भारत के पहले पूरी तरह से स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर के तौर पर कमीशन किया गया था। इसे भारतीय नौसेना की शक्ति का परिचायक भी माना जाता है। यह दौरा भारत और श्रीलंका के बीच अच्छी नीयत की लंबी परंपरा को जारी रखता है, जिससे आपसी भरोसा और सहयोग मजबूत होता है। भारत और श्रीलंका के सैन्य संबंध काफी पुराने और मजबूत हैं। दोनों देश संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद सेना से सेना के संपर्क को बनाए रखे हुए हैं।

श्रीलंकाई नौसेना अपनी 75वीं सालगिरह के जश्न के हिस्से के तौर पर अपना फ्लीट रिव्यू कर रही है और इसमें कई देशों के जहाज एक साथ आएंगे, जो कोलंबो की क्षेत्रीय समुद्री डिप्लोमेसी में अपनी बढ़ती भूमिका को दिखाने की इच्छा को दिखाता है। आईएनएस विक्रांत का आना न केवल एक डिप्लोमैटिक इशारा है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ी हुई समुद्री क्षमताओं का एक स्ट्रेटेजिक प्रतीक भी है।